मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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गुजरी हुई जिंदगी और बीते हुआ पल एक बंद किताब की तरह हैं। उसमें कुछ सुनहरे अध्याय हैं, तो कुछ दुखद गलतियाँ और अफसोस भी हैं, लेकिन एक बात निश्चित है कि आप उन पन्नों को फिर से लिख नहीं सकते। बीती बातों को याद करके दुखी होना या अपनी गलतियों पर पछताना, सिर्फ़ आज की ऊर्जा को नष्ट करना है। किसी शायर ने ठीक ही कहा है कि “गुजरी हुई जिंदगी को कभी याद ना कर, “तकदीर में जो लिखा है, उसकी फरियाद ना कर, जो होगा वो होकर रहेगा तु कल की फ़िक्र में, अपनी आज की हंसी बर्बाद ना कर । हंस मरते हुए भी गाता है और मोर नाचते हुए भी रोता है, ये जिंदगी का फंडा है, दुखों वाली रात नींद नहीं आती और खुशी वाली रात कौन सोता है”।
इसलिए गुजरी हुई जिंदगी कभी याद ना करें क्योंकि जो चला गया, उसे बदला नहीं जा सकता। उससे सीख लेकर आगे बढ़ें और कल की फ़िक्र में आज की हँसी को बर्बाद ना करें क्योंकि कल कभी नहीं आता और आता है तो बस ‘आज’। वर्तमान में जीना सीखें। छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करें। अपने प्रियजनों के साथ बिताए गए हर पल की कद्र करें क्योंकि जब यह ‘आज’ भी ‘कल’ बन जाएगा, तब आपके पास पछताने के लिए कुछ नहीं, बल्कि संजोने के लिए खूबसूरत यादें होंगी।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

