मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहते हुए उसका दूसरों से संवाद होना स्वाभाविक है, लेकिन हर संवाद तर्कसंगत और उपयोगी हो, यह जरूरी नहीं है। कभी-कभी हमें ऐसे लोगों से भी पाला पड़ता है, जो ना तो किसी तर्क को मानते हैं और ना ही किसी भी प्रकार के ज्ञान को स्वीकार करते हैं। ऐसे व्यक्ति से बहस करना अपनी ऊर्जा, समय और मानसिक शांति को बर्बाद करने जैसा है। मूर्खतापूर्ण राय से बचने के लिए अपने विचार धारणाओं या सुनी-सुनाई बातों के बजाय तथ्यों और स्पष्ट समझ पर आधारित करें।
मूर्ख व्यक्ति से बहस करना एक ऐसा जाल है, जिसमें फंसने पर आपकी गरिमा, समय और मानसिक शांति, सब कुछ खतरे में पड़ जाता है। इस निरर्थक प्रयास से जितना संभव हो सके, बचना चाहिए क्योंकि जब आप ऐसे व्यक्ति से बहस करने लगते हैं, तो आप भी उसी की तरह बर्ताव करने लगते हैं और यही वह क्षण होता है, जब आप में और उसमें कोई फर्क नहीं रह जाता। एक बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि कुछ लड़ाइयाँ लड़ने के लायक नहीं होतीं और ऐसे व्यक्ति से बहस करना उन्हीं में से एक है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

