Thursday, February 26, 2026
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महर्षि बाल्मीकि जयंती पर अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार के सुपौत्र मूलचन्द मेधोनिया ने जाकर नमन किया

मूकनायक/मूलचन्द मेधोनिया पत्रकार भोपाल/मध्य प्रदेश

आदि कवि महर्षि बाल्मीकि महाराज जी की जयंती शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पर मनाई जाती है। जो कि बाल्मीकि समाज के आराध्य देव थे, जिन्होंने संस्कृत में अपनी रचना लिख कर महान हुए है। जिन्हें लोगों ने बुरा बताने, उन पर कीचड़ लगाने का बहुत प्रयास किया किसी ने उन्हें बृहमण बताया तो किसी ने उन्हें नीच कुल में जन्म लेने का बताया कि वह अमुक बिरादरी में पैदा हुए है।
लेकिन बड़ा ही दुर्भाग्य है कि जो भी महापुरुषों का अवतरण हुआ उन्होंने समाज कल्याण के लिए कुछ न कुछ अच्छा प्रयास कर जगत में अपना नाम रोशन कर अमर हुए है। जैसे कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज, सतगुरु कबीर साहेब जी, नानकदेव जी, पल्टू जी, पीपा जी, सुन्दरदास जी, बाबा घासीराम जी, मीराबाई जी जैसे अनेकों संत महाराजों का अवतरण समाज को जगाने एवं लोक कल्याण के लिए ही हुआ था। जिंन्हें आज भी लोग श्रद्धा पूर्वक याद कर नमन करते है। यह बात सही है कि जिन भी महापुरुषों ने नेकी के काम किये है। उन्हें बदनाम करने की हमेशा कोशिश होती रही है, और वह इसलिए कि उन्होंने सदियों से वंचित समाज को जगाने का काम किया है। वश यही कारण है कि जो वंचितों की जो बात करते आयें है उनके इतिहास को सदैव दबाने की हमेशा कोशिश होती रही है। चाहे वह महर्षि सुदर्शन महाराज जी हो, नामदेव जी, या चाहे सेन महाराज जी हो ये सभी संत तथाकथित लोगों द्वारा नीची बिरादरी के मानने के कारण अथवा उनके द्वारा देश के मूल निवासी समाज में काम किया है इस कारण उनको छुपाने का भरपूर प्रयास किया गया है।

महर्षि बाल्मीकि महाराज जी एक ऐसे महान संत थे, जो कि आदि कवि के नाम से जाने जाते है। जिन्हें कहा जाता है कि उनके द्वारा संस्कृत में रामायण की रचना की है। लेकिन बडे़ ही दुख की बात है कि जिस रामायण का देश के लोग दिन रात जाप करते है, आस्था और विश्वास करते है। जिसके रचियता को लोग जयंती तक नहीं मनाते, और बताया दिया कि वह तो बाल्मीकि समाज के थे। जो कि बाल्मीकि समाज ही उन्हें अपना आराध्य मानकर बडे़ उत्साह से श्रद्धाभाव से जयंती मनाती है, लेकिन जो अपने महापुरुषों का इतिहास बाल्मीकि रामायण से खोज कर सीना चौड़ा कर अपना इतिहास उकेरते है। ऐसे लोगों का भी दायित्व होना चाहिए कि वह महर्षि बाल्मीकि महाराज जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मना कर अपने देश के महान महापुरुषों को वंदन एवं नमन करें।

उक्त उद्गार वरिष्ठ पत्रकार मूलचन्द मेधोनिया जो कि अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी के सुपौत्र है उनके द्वारा महर्षि बाल्मीकि जी की जयंती के अवसर पर भोपाल के विभिन्न जगहों पर आयोजित कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पहुँच कर समाज को संदेश दिया। भोपाल के राहुल नगर बाल्मीकि मंदिर में जयंती कार्यक्रम में जाकर गुरु देव जी के चरणों में नमन किया। तथा पंचशील नगर, बलवीर नगर की बस्ती में जाकर महर्षि बाल्मीकि जी के चरणों में पुष्प अर्पित कर वंदन किया।

अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी के पौते मूलचन्द मेधोनिया का आयोजकों द्वारा तिलक लगाकर स्वागत सत्कार किया। तथा बाल्मीकि समाज के सभी नागरिकों ने कहा कि हमारी कौम में बड़े बड़े संत महात्मा साधु और गुरुओं का जन्म हुआ है। साथ ही देश की मातृभूमि पर न्यौछावर होने वाले शूरवीर मनीराम अहिरवार जी जैसे महान क्रांतिकारी ने जन्म लेकर हमें आजादी दिलाई है। जिन्हें आज तक सम्मान नही देकर हमारी बिरादरी का अपमान किया गया है। बाल्मीकि समाज ने सरकार से मांग की है कि अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा प्रदान करते हुए उनकी जन्म भूमि पर समाज हितों के लिए विशाल स्मारक, मूर्ति, सामाजिक प्रेरणा केन्द्र बनाया जाये। तथा शहीद परिवार के उत्तराधिकारी मूलचन्द मेधोनिया के परिवार को जो शहीद परिवार को दी जाने वाली सुविधा है उन सभी को देकर सम्मानित जाये। बाल्मीकि समाज के बलवीर सिंह, पवन सिंह, राधे लाल, प्रमोद कुमार, रविकांत, भूरा नहारिया, गोलू लोट, नरेन्द्र बाल्मीकि, अवध घावरी भूपेंद्र करोसिया इत्यादि बाल्मीकि समाज के प्रमुख नागरिकों ने सामाजिक तौर पर सरकार से मांग कर अपेक्षा की है कि सरकार हमारे देश के महान क्रांतिकारी वीर मनीराम जी का सम्मान देकर बिरादरी को गौरवान्वित किया जाये।

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