मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जब इंसान को कोई नया विकल्प मिलता है, तो उसका मन दो तरह की भावनाओं का अनुभव करता है, नई चीजों में खूबियाँ देखना और पुरानी यादों को संजोना। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मनुष्य स्वभाव से ही नई चीजों के प्रति उत्सुक होता है और साथ ही अतीत की यादों से भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है। मनुष्य में हमेशा से कुछ नया खोजने और जानने की जिज्ञासा रही है। नए विकल्प हमें यह मौका देते हैं कि हम अपने आराम के दायरे से बाहर निकलकर कुछ नया सीखें और आगे बढ़ें। नया विकल्प सामने आने पर हम स्वाभाविक रूप से उसकी तुलना अपने पास मौजूद पुरानी चीज़ से करते हैं। इस तुलना में, नई चीज़ की चमक और आकर्षण ज्यादा दिखाई देता है, जबकि पुरानी चीज़ की कमियाँ नज़र आने लगती हैं।
जब इंसान को नए विकल्प चुनने का डर या संशय होता है, तो पुरानी यादें एक भावनात्मक सहारा देती हैं। वे हमें एक ऐसी जगह का अहसास कराती हैं, जो परिचित और सुरक्षित थी।नए विकल्प के साथ आने वाली चुनौतियों के बीच, पुरानी यादें हमें उन पलों को याद दिलाती हैं, जब सब कुछ सरल और सुखद था। यह पुरानी यादें हमें एक प्रकार का सुकून देती हैं। इसलिए, जब इंसान के सामने कोई नया विकल्प आता है, तो वह केवल एक चीज के बारे में नहीं सोचता, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। नई खूबियाँ उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं, जबकि पुरानी यादें उसे उसके मूल और अनुभवों से जोड़े रखती हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

