मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझना एक अमूल्य गुण है, जो मानवता की पहचान है। यह हमें एक-दूसरे से जोड़ता है और हमें स्वार्थ की सीमाओं से ऊपर उठकर एक बेहतर इंसान बनाता है। यह एक ऐसी शक्ति है, जो हमें ना केवल व्यक्तिगत संबंधों को मज़बूत करने में मदद करती है, बल्कि एक संवेदनशील और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करने में भी सहायक होती है। यदि हम सब इस भावना को अपने जीवन में अपना लें, तो यह दुनिया निश्चित रूप से एक बेहतर जगह बन जाएगी। जब लोग एक-दूसरे के दर्द को समझते हैं, तो समाज में सामंजस्य और एकता भी बढ़ती है।
दूसरे के दर्द को वही इंसान सबसे अच्छा समझ सकता है, जिसने खुद उसे गहराई से महसूस किया हो। जीवन के संघर्षों से जूझा व्यक्ति दूसरों के दर्द में अपनी झलक देखता है और बिना शब्दों के भी उस भावना को समझ सकता है। ऐसा व्यक्ति केवल सहानुभूति नहीं बल्कि सच्ची हमदर्दी और अपनापन दे पाता है। दर्द का अनुभव इंसान के भीतर करुणा और संवेदनशीलता को जगाता है, जिससे वह दूसरों की तकलीफ में साथी बनता है। दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझना एक महत्वपूर्ण सामाजिक और मानवीय कौशल भी है जो हमें एक बेहतर समाज का निर्माण करने और एक-दूसरे के प्रति अधिक करुणामय और संवेदनशील बनने में मदद करता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

