मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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कान भरने वाले लोग अविश्वासी और धोखेबाज होते हैं, जो आग लगाकर किनारा कर लेते हैं । यह कहावत उन लोगों के व्यवहार को दर्शाती है, जो दूसरों के बीच गलत सूचना या अफवाहें फैलाकर संघर्ष पैदा करते हैं और फिर स्थिति बिगड़ जाने पर या तो खुद को बचा लेते हैं या फिर पीछे हट जाते हैं। ये लोग सीधे टकराव से बचते हुए, दूसरों को उलझाते हैं और अपनी बातों से अराजकता फैलाते हैं। ऐसे लोगों की पहचान उनके विश्वसनीय न होने, रिश्तों में समस्याएं पैदा करने और नैतिक मूल्यों की कमी से होती है। कान भरने वाले लोग अक्सर आपके के खिलाफ दूसरों को भड़काना या गलत जानकारी देते हैं, ताकि उसके मन में किसी और के प्रति गलत विचार पैदा हो सकें।
कान भरने वाले अविश्वासी लोग सीधे तौर पर किसी से बहस या लड़ाई में नहीं पड़ते। वे विवादों से बचते हैं और अपनी पहचान छिपा कर काम करते हैं और आग लगाकर किनारा कर लेते हैं । ऐसे लोग जानबूझकर किसी रिश्ते या स्थिति में ऐसी बातें फैलाते हैं जिससे आग (संघर्ष या गलतफहमी) भड़के और फिर खुद वहां से दूर हो जाते हैं। इस प्रकार, वे किसी को नुकसान पहुंचाते हुए भी अपनी जिम्मेदारियों से बच निकलते हैं। इसलिए किसी की कही हुई बातों पर तुरंत विश्वास न करें, सतर्क रहें और सच की पड़ताल करें जिसके फलस्वरूप ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही समझदारी है, जो लगातार दूसरों के बीच आग लगाते हैं। ऐसी अवस्था में विश्वास बनाए रखें और इस प्रकार के लोगों पर निर्भर ना रहें, जो दूसरों की बातों को फैलाने में माहिर हों।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

