
बिलासपुर
फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्रों ने समाज सुधारक, तार्किक चिंतक और आत्मसम्मान आंदोलन के जनक पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर (1879–1973) की जयंती मनाई। इस अवसर पर बच्चों को पेरियार के जीवन, उनके विचारों और समाज सुधार की दिशा में किए गए क्रांतिकारी कार्यों से परिचित कराया गया।
दक्षिण भारत के ईरोड (तमिलनाडु) में जन्मे पेरियार ने अल्पशिक्षा के बावजूद अपने तार्किक प्रश्नों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंधविश्वास, जातिवाद और पितृसत्ता को गहरी चुनौती दी। उन्होंने सामाजिक समानता की नींव रखते हुए अस्पृश्यता के खिलाफ आंदोलन चलाए, ‘आत्मसम्मान आंदोलन’ और ‘द्रविड़ कषगम’ की स्थापना की तथा स्त्रियों की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए साहसिक कदम उठाए।
आरक्षण और सामाजिक न्याय की लड़ाई में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा। उनके संघर्षों के परिणामस्वरूप संविधान में संशोधन हुआ और समाज में दलितों-पिछड़ों के अधिकारों की नींव और मजबूत हुई।
पेरियार को उनके अनुयायियों ने ‘थंथाई’ (पिता) और ‘पेरियार’ (महान) की उपाधियों से अलंकृत किया। यूनेस्को ने उन्हें “दक्षिण-पूर्व एशिया का सुकरात” कहते हुए सम्मानित किया।
आज जब समाज में समानता और तार्किकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, तब पेरियार का जीवन और विचार छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी जयंती पर लिया गया यह संकल्प ही उनके प्रति हमारा सच्चा सम्मान है कि हम भी अंधविश्वास, अन्याय और असमानता के विरुद्ध खड़े होंगे।

