मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में प्रेम और खुशी का क्रम एक सतत प्रक्रिया है, जहाँ प्रिय लोग और सुखद अनुभव हमें जीवन के उतार-चढ़ावों से गुजरने की शक्ति देते हैं, और एक-दूसरे के साथ जुड़कर हम एक पूर्ण और अर्थपूर्ण जीवन जीते हैं, भले ही हमें दुख और कठिनाइयों का सामना करना पड़े। दिन और रात की तरह मनुष्य जीवन में प्रिय और अप्रिय घटना क्रम आते जाते रहते हैं। इन अनुभूतियों के कारण ही जीवन की शोभा और सार्थकता है। प्रिय और अप्रिय घटनाएं जीवन का अभिन्न अंग हैं जिनके अनुभव से हमें सीख मिलती है ।*
यदि एक ही प्रकार की परिस्थितियां सदा बनी रहें तो यहां सब कुछ रूखा और नीरस लगने लगेगा। सदा दिन ही रहे, कभी रात न हो, सदा मिठाई ही खाने को मिले कभी नमक के दर्शन न हों, सब की उम्र एक–सी रहे, न कोई छोटा हो न बड़ा, सर्दी या गर्मी की एक सी ऋतु सदा रहे, दूसरी बदले ही नहीं, तो फिर इस संसार की सुंदरता ही नष्ट हो जायगी। सदा प्रिय, अनुकूल और सुखद परिस्थितियां बनी रहें, कभी अप्रिय और प्रतिकूल स्थिति न आवे तो कुशलता, कर्मनिष्ठा और जीते हुए किसी प्रकार मौत के दिन पूरे किया करेंगे। जीवन की प्रिय घटनाएँ व्यक्ति के कर्मों, उसकी सोच और बाहरी परिस्थितियों के मेल से होती हैं। जीवन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जहाँ व्यक्ति घटनाओं के माध्यम से सीखता है, विकसित होता है और अंततः संतुष्टि प्राप्त करता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

