मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
एक सोच
आज का दिन खास है, आज की तारीख अनमोल,
जनमे थे पेरियार, जिनके विचार हैं बेमोल।
वो आए थे जगाने, जो सोया था समाज,
मिटाने को हर बंधन, मिटाने को हर नाज।
ज्ञान की मशाल
जात-पात की दीवारों को, उन्होंने दिया था तोड़,
अंधविश्वास की बेड़ियों से, इंसान को दिया मोड़।
हर नारी को हक मिले, हर बच्चा करे सवाल,
यही था उनका सपना, यही था उनका ख्याल।
तर्क का सूरज
तर्क की लौ जलाकर, ज्ञान का सूरज उगाया,
आत्म-सम्मान का रास्ता, हर दिल में समाया।
वो सिर्फ एक नाम नहीं, वो एक विचार थे,
जो युगों के अंधकार पर, एक प्रहार थे।
अमर विरासत
आज हम आजाद हैं, उनकी सोच की देन से,
पेरियार अमर रहेंगे, हमारे हर एक प्रेम से।
जन्मदिन की शुभकामनाएँ, उस महान शख्सियत को,
जिसने बदल दी दिशा, जिसने बदल दी हकीकत को।
उनकी बातें, उनके कार्य, हर दिन एक नई प्रेरणा,
पेरियार की विरासत, एक नई चेतना।
लेखक: बृजेश कुमार जाटव भोपाल
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