मूकनायक / देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
आज 17 सितंबर 2025 है, यानी कि हमारे समाज सुधारक पेरियार रामा स्वामी नायकर जी की जयंती है। जो कि हमारे देश के बहुत बड़े समाज सुधारक हुए हैं। पेरियार जी का जन्म 17 सितंबर 1879 तमिलनाडु में हुआ था। उन्हें लोग सम्मान से पेरियार जी बोलते हैं जिसका अभिप्राय है : महान व्यक्ति। पेरियार जी को महान व्यक्ति उनके द्वारा किए गए महान कायों की वजह से बोला गया है,जिनका हम आज भी हम सम्मान करते हैं,और उनके बताए गए मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने हमारे देश में काफी कुप्रथाओं को दूर किया जैसे जाति प्रथा, विधवा विवाह, सामानता, स्वतंत्रता और महिला शिक्षा पर भी उन्होंने काफी सुधार किया। पेरियार जी ने बोला था :
“देश की बर्बादी में हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा,चिकित्सा ,रोजगार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं”।
पेरियार जी ने तार्किक और वैज्ञानिक सोच को ज्यादा बढ़ावा दिया था ना कि उसे सोच को जो धार्मिक चीजों पर जुड़ी हुई थी। उन्होंने एक नई धारणा को जन्म दिया था जोकि एक नई प्रणाली को मजबूत बनाती है। जिसे अपना एक दार्शनिक पहलू है ना कि एक विचार या मूर्खता पर टिका हुआ हो। उन्होंने हमारे समाज में से जुड़े काफी ऐसे मुद्दों या कुरितियों पर सवाल उठाए जो उन्हें मान्य नहीं थे। उन्होंने महिला अधिकारों पर वकालत की और उन पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को कहा जिसका अभिप्राय है कि उन्होंने महिला समानता और स्वतंत्रता उनकी शिक्षा पर भी विचार किया। उन्होंने जाति व्यवस्था और समानता पर भी अपने विचार रखें और उन पर कार्य भी किया।
पेरियार जी ने अपने जीवन काल में कई आंदोलन भी चलाएं जिनमें से कुछ हैं:
हिंदी विरोधी आंदोलन जो कि 1938 में किया गया जिसमें हिंदी को अनिवार्य बनाने के मिला एफ आंदोलन किया गया।
सत्याग्रह आंदोलन 1925 जिसमें सवाल सामानता, स्वतंत्रता , ब्राह्मणवाद और जातिवाद पर भी पर भी कार्य किया गया।
महिला अधिकारों पर आंदोलन में महिला स्वतंत्रता, महिला समानता और उनकी शिक्षा पर भी विचार व्यक्त किए गए और उनको देश और समाज में पुरुषों के बराबर लाने की पुरजोर कोशिश की गई।
कस्तूरी रंगनाथन आंदोलन में ब्राह्मणवाद के खिलाफ अखबारों में और लेखन के जरिए लिखने की स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया गया।
मंदिर विरोधी आंदोलन 1929 में हरिजन और दलितों को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए संघर्ष किया था।
पेरियार जी ने द्रविड़ आंदोलन भी चलाया था और उन्होंने कांग्रेस पार्टी में भी सदस्यता ली थी जो कि बाद में उन्होंने छोड़ भी दी थी क्योंकि वहां पर जातिवाद के चलते उन्हें अच्छा अनुभव नहीं कराया गया था,जिसका प्रमुख कारण था कांग्रेस में जाति व्यवस्था और राजनीतिक अवस्था में उदासीनता। जिसका अभिप्राय ये है कि इसमें जाति व्यवस्था को काफी प्रमुखता दी गई होगी। जिसके चलते पेरियार जी ने कांग्रेस को छोड़ने का निर्णय लिया होगा।
तमिलनाडु सरकार पेरियार जी के जन्मदिन को सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मानती है। जो कि उनके महान कार्य को देखते हुए उन्हें सम्मानित करने के लिए वहां की सरकार ऐसा करती है। पेरियार जी की मृत्यु 24 दिसंबर 1973 में हुई थी। ऐसे महान आत्मा को हम उनके जन्मदिन पर कोटि-कोटि प्रणाम करते हैं और उनके महान कार्यों के लिए उनके चरणों में समर्पित पुष्प अर्पित करते हैं। ऐसे महान समाज सुधारक को हमारे देश में और समाज में हमेशा याद रखा जाएगा और पेरियार नाम हमेशा अमर रहेगा।
पत्रकार : नीलम अंबेडकर
जिला के ब्यूरो सोनीपत हरियाणा

