Thursday, February 26, 2026
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पंजाब बाढ़ राहत हेतु दान की राशि– बड़ी कुम्हारी के लोगों का सराहनीय प्रयास

मूकनायक , बालाघाट ब्यूरो -आकाश घरडे़

बालाघाट, 09 सितम्बर। देश की एकता और सामाजिक बंधन का असली चेहरा तब सामने आता है जब कोई आपदा या प्राकृतिक विपत्ति किसी राज्य या क्षेत्र को प्रभावित करती है। हाल ही में पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ ने वहां के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। हजारों परिवार बेघर हुए, फसलें और पशुधन नष्ट हुए तथा आमजन भारी संकट में आ गए। ऐसी परिस्थितियों में देशभर से मदद की अपील हुई और हर वर्ग ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग का हाथ आगे बढ़ाया। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के तहसील क्षेत्र में स्थित ग्राम बड़ी कुम्हारी के सर्वसमाज ने एकजुट होकर बाढ़ प्रभावितों के लिए सहयोग राशि एकत्रित करने का सराहनीय निर्णय लिया है।सामाजिक एकता का प्रतीक एवं सर्व समाज के नंदकिशोर रनगिरे असलम भाई ,अनंत नगपूरे ,छोटू दशहरे ,इमरान खान ,राजू रनगिरे डॉक्टर मनोज लिल्हारे ,रविशंकर लिल्हारे ,चमनलाल लिल्हारे अक्षय गराडे़ ,राहुल मेश्राम निखिल मेश्राम ,राजू सोनी अश्वनी घरडे़, कालू भाई ,दिनेश नागपुर ,रंजीत भाई विजय लिल्हारे और साथ में पत्रकार आकाश घरडे़ भी मौजूद रहे।

ग्राम बड़ी कुम्हारी की यह पहल यह दर्शाती है कि समाज चाहे किसी भी जाति, वर्ग या धर्म का हो, मानवता सबसे बड़ी पहचान है। “सर्वसमाज” का तात्पर्य ही यही है कि सभी लोग एक साथ मिलकर जरूरतमंदों की सहायता करें। इस प्रयास से समाज में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना और भी प्रबल होती है।सहयोग की भावना और जिम्मेदारीबाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं सिर्फ किसी क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे देश की चुनौती होती हैं। जिस तरह स्वतंत्रता संग्राम के समय पूरा देश एक होकर लड़ा था, उसी तरह आज प्राकृतिक आपदा के समय सबको एकजुट होना पड़ता है। बड़ी कुम्हारी ग्राम के नागरिकों ने यह दिखा दिया कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आर्थिक सहयोग देने का बीड़ा उठाया, ताकि पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री और जीवन-यापन के लिए आवश्यक मदद पहुंच सके।

बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों से प्रेरणा

यह सहयोगात्मक कदम कहीं न कहीं डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से भी मेल खाता है। आंबेडकर ने हमेशा कहा था कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब हम समानता, भाईचारे और न्याय को व्यवहार में उतारें। बड़ी कुम्हारी ग्राम का यह कार्य आंबेडकर के समाजिक भाईचारे के सिद्धांत को जीवंत करता है।सामाजिक योगदान का महत्वइतिहास गवाह है कि जब-जब प्राकृतिक आपदाएं आईं, तब-तब समाज ने सामूहिक प्रयासों से बड़ी-बड़ी कठिनाइयों को पार किया। चाहे वह गुजरात का भूकंप हो, उत्तराखंड की बाढ़ हो या ओडिशा का चक्रवात—हर बार देश ने मिलकर राहत और पुनर्वास कार्य किए। बड़ी कुम्हारी के लोगों का यह योगदान न केवल पंजाब के लोगों के लिए राहत का साधन बनेगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह सिखाएगा कि संकट के समय हमें अपने घर-परिवार से आगे बढ़कर पूरे देश को परिवार मानना चाहिए।

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