मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में खुशी और गम, दोनों ही होते हैं और यही जीवन का सत्य है। हमें इन दोनों को स्वीकार करके उनका सामना करना चाहिए, ताकि हम अपने आत्मविकास की ओर बढ़ सकें और दूसरों के साथ सहजता से जीवन बिता सकें। गुजरे वर्षों में भावनाओं में प्रबलता थी, रुपए सीमित थे, लेकिन सुकून था। खुशी और गम एक सिक्के के दो पहलू हैं, जो जिंदगी के साथ बराबरी से चलते रहते हैं । जैसे दिन और रात, सकारात्मक और नकारात्मक, हार और जीत जीवन का हिस्सा हैं, वैसे ही खुशी और गम भी जीवन का अभिन्न अंग हैं ।
जब घर की बेटी विदा होकर घर से जाती है, तब माता पिता भाई बहन परिवार वाले और लड़की खुद, सभी के आँखों में आँसू आ जाते हैं, जबकि यहाँ तो दोनों बातें होती हैं, खुशी इस बात की होती है कि बेटी एक नया संसार बसाने जा रही है और दुख इस बात का है कि वह घर छोड़कर जा रही है। खुशी हमें ऊर्जा, प्रेरणा और जीवन जीने का उत्साह देती है, जिससे लक्ष्य को प्राप्त करने और जीवन का आनंद लेने में मदद मिलती है । वहीं, गम जीवन के मूल्य को समझाता है और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की ताकत देता है, जिससे व्यक्ति कृतज्ञता और सहानुभूति की भावना सिखता है । इसलिए यह सबसे जरूरी है कि व्यक्ति दोनों भावनाओं के बीच संतुलन बनाएं रखें ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

