मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
आज हर कोई बड़ा बनना चाहता है, लेकिन दिन में एक बार कुछ वक्त के लिए बच्चा बन कर देखिए, आप अपना सारा तनाव, दुख दर्द और सारी थकान भूल जाएंगे और कल के लिए फिर से ऊर्जावान बन जाएंगे। दुनियां हमसे तभी तक प्रेम करेगी, जब तक हम प्रेम और शांति से भरे रहेंगे। मेहनत और लगातार अभ्यास, एक ऐसी चाबी है, जो भाग्य के बंद दरवाजे को भी खोल देती हैं। बड़ा सोचोगे तभी तो बड़ा बनोगे। छोटी सोच और पांव की मोच कभी आगे नहीं बढ़ने देगी।
वर्तमान में लोगों को गिला शिकवा रहता है कि बहुत कम मिला है, सोचिए, जितना हमें मिला है, उतना कितने लोगों को मिला हुआ है। बाकि संतोष और संतोषी जीवन का सार है, जो है, वह पर्याप्त है। इसलिए अपना वजूद ऐसा बनाओ कि कोई आपको छोड़ तो सके लेकिन कभी भुला ना सके । इसके साथ ही प्रभावी माता-पिता बनने के लिए अपने बच्चों को वैसे ही देखना होगा, जैसे वे अभी हैं, ना कि जैसे वे पहले हुआ करते थे। उज्जवल भविष्य बनाने के लिए अपने बच्चों को ऐसी गतिविधियाँ करने के लिए प्रोत्साहित करें, जिनमें उसे आमतौर पर आनंद आता हो ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

