मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर इंसान को सामाजिक दबाव, दूसरों पर रूतबा जमाने या अन्य किसी कारण से एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं। मगर इंसान को झूठ पे झूठ बोलने से पहले यह बात सोच लेनी चाहिए कि जब हमारा झूठ पकड़ा जायेगा, तब क्या होगा ? हमें अपने झूठ को बचाने के लिए और झूठ इसलिए भी बोलनी पड़़ती है, क्योंकि झूठ के बारे में सामने वाले को यदि पता चल गया तो वो आगे से कभी आप पर विश्वास नहीं करेगा। लोग विभिन्न मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारणों से झूठ बोलते हैं, जैसे आत्म-सुरक्षा, दूसरों की भावनाओं को चोट पहुँचाने से बचना, सामाजिक दबाव, दूसरों पर प्रभाव डालना या किसी अजीब स्थिति से निकलना।
कई बार झूठ बोलना एक आदत या किसी समस्या से निपटने का तरीका भी बन जाता है और कुछ मामलों में, यह खुद को धोखा देने या आत्मविश्वास की कमी से भी जुड़ा हो सकता है। यह भी सच है कि झूठे व्यक्ति की ऊंची आवाज़ सच्चे व्यक्ति को चुप करवा देती है, लेकिन सच्चे व्यक्ति का मौन मौका आने पर झूठे व्यक्ति की नींव को हिला देता है। इसलिए झूठ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि इससे विश्वास टूटता है, रिश्ते खराब होते हैं, और व्यक्ति को चिंता, तनाव और अपराधबोध महसूस हो सकता है, झूठ बोलने से छवि खराब होती है, करियर और आर्थिक नुकसान होता है। इसके अलावा, लंबे समय में यह व्यक्ति के चरित्र को नुकसान पहुंचाता है और उसे मानसिक रूप से भी कमजोर बनाता है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

