मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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वर्तमान समय में अक्सर लोग धन को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं, परंतु धन बड़ा नहीं है, जबकि समय धन से कहीं अधिक मूल्यवान है क्योंकि धन को वापस कमाया जा सकता है, लेकिन एक बार बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता है. धन भौतिक वस्तुओं को खरीद सकता है, लेकिन यह समय नहीं खरीद सकता और जो लोग समय का बुद्धिमानी से उपयोग करते हैं, वे इसे धन में बदलने में सक्षम होते हैं, वहीं समय का सदुपयोग सफलता, आत्मविश्वास और अनुशासन की कुंजी है, जबकि समय की बर्बादी भविष्य के साथ खिलवाड़ है
जो व्यक्ति समय का मूल्य जानता है, समय का सदुपयोग करना जानता है, अच्छा समय उसी का होता है और जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करके कड़ी मेहनत से अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है, वहीं सफलता ग्रहण करने व सुखमय जीवन जीने का पात्र बनता है । इस संबंध में यदि गहनता से विचार करें तो मानव जीवन का असली धन समय के साथ साथ स्वास्थ्य, संतुष्टि, प्रेम, अच्छे रिश्ते, संस्कार और दूसरों की भलाई में निहित है, न कि आर्थिक संपत्ति में। यह आत्मा की समृद्धि, आत्म-ज्ञान और समाज में योगदान करने में अहम भूमिका निभाता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

