मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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परस्पर सहयोग से आपसी प्रेम और सम्मान की भावना बढ़ती है। जब लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रति अधिक सम्मान और प्रेम रखते हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि सुख बांटने से दोगुना हो जाता है और दुख बांटने से आधा रह जाता है। जब हम अपने सुख को किसी परिवारिक सदस्य, मित्र या संबंधी के साथ बांटकर प्राप्त सुख का भोग करते हैं तो हमारा सुख दोगुना हो जाता है। इसी तरह जब कोई अपना हमारे जीवन में आए हुए दुख को बांटता है तो हमारा दुख आधा रह जाता है। वस्तुत: सुख और दुख को बांटने की प्रकिया में मूल रूप से व्यक्ति की संवेदना ही काम करती है।
इसलिए जिसकी संवेदना जितनी अधिक होती है और जिसकी भावनाएं जितनी अधिक संस्कारित और मानवीय होती हैं, वह उतने ही लंबे प्रीतिभाव से दूसरे का सुख या दुख बांट पाता है। अगर ऐसा नहीं होता तब व्यक्ति अपने से भिन्न किसी का सुख देखकर उसके प्रति या तो ईर्ष्यालु हो जाता है । हम सभी एक दूसरे के बिना अधूरे हैं । परस्पर तालमेल व सहयोग करने से रिश्ते मजबूत होते हैं क्योंकि अपनापन, आदर और वक्त की दौलत से बढ़कर कोई उपहार नहीं है जिसके फलस्वरूप जीवन में हमारे लिए अपनों का साथ अत्यंत आवश्यक है क्योंकि मानव जीवन में सुख हो तो बढ़ जाता है और दुख हो तो बट जाता है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

