मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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परिवार जीवन का अभिन्न अंग होता है, जहां बिना शर्त प्रेम, सुरक्षा और अधिकार आदि ऐसी चीजें मिलती हैं, जो दूसरी जगह नहीं मिल पातीं, लेकिन जब परिवार में लड़ाई झगड़ा आम बात हो जाती है, तब परिवार का सुख चैन समाप्त हो जाता है और परिवार टूटकर बिखरने लगता है। परिवार में अक्सर भाई-भाई, सास-बहू, पति पत्नी, ननद-भाभी आदि में कई मुद्दों पर छोटी-छोटी बहस होने लगती है । इन छोटे-छोटे झगड़ों को यदि समय रहते ना सुलझाया जाए तो गृह क्लेश बढ़ जाते हैं और रिश्ते टूटकर बिखरने लगते हैं । खराब संचार, अपेक्षाओं का टकराव, ईर्ष्या, स्वार्थ, शक, धैर्य व सहनशीलता का अभाव और परस्पर सम्मान ना देने से अक्सर परिवारों में कलह होता है।
किसी भी परिवार में मनमुटाव होना आम बात है, लेकिन इस मनमुटाव को गलतफहमी में ना बदलने दें। अक्सर गलतफहमी होने पर लोग आपस में बात करना ही बंद कर देते हैं। इससे बेहतर है कि आपस में बातचीत करें और मनमुटाव को दूर करें। जिससे परिवार में सुख-शांति बरकरार रहे। पारिवारिक कलहों के पीछे कई बार छोटी छोटी बातों की वजह से ही सुख-शांति के माहौल में तनाव फैल जाता है। घर में इस तरह के माहौल से पारिवारिक सदस्यों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप नुकसान का सामना करना पड़ता है। साथ ही घर के बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

