
मूकनायक /कमलेश लवहात्रै
बिलासपुर छत्तीसगढ़
भारतीय रेल अपने रेल यात्रियों के प्रति कितनी गंभीर है इसका ताजा उदाहरण यात्री ट्रेन के एसी कोच में टपकता पानी यह इस बात को प्रमाणित करता है कि भारतीय रेल प्रशासन सिर्फ और सिर्फ परिवहन को ही प्राथमिकता देता है।
आपको बताते चलें कि यात्री ट्रेन के इसी कोच में बरसात का पानी सिर्फ एक जगह नहीं कई जगह से टपक रहा है ,यह इस फोटो से साफ जाहिर होता है कि रेल मंत्रालय मॉडल स्टेशन यात्रियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में अरबो रुपए खर्च कर बनाने जा रही है कई शहरों में तो कार्य प्रारंभ भी कर चुका है यह तो आने वाला समय ही बताएगा की मॉडल स्टेशन का परिचालन खुद रेल मंत्रालय करती है या वह भी किसी निजी मुझे हाथों में सोपती है ।
जहां तक यात्री रेलगाड़ी के एसी कोच में पानी टपकने का मामला है तो इसके कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह उठाना जायज है कि यात्री ट्रेन छूटने के पहले 5 से 7 घंटे संबंधित रेल अधिकारियों के देखरेख में दिए गए निजी कॉन्टैक्टर से रखरखाव व मरम्मत कार्य पूरा करने के बाद रेल अधिकारियों के सहमति के बाद ही उसे यात्री ट्रेन को रवाना किया जाता है और बरसात के दिनों में पानी के बचाव के लिए अतिरिक्त निविदा आमंत्रित कर प्राइवेट ठेकेदारों को इसका कार्य रेल विभाग के द्वारा दिया जाता है।
यात्री ट्रेनों में पूरी तरह एसी कोच में पानी टपकना उन रेल अधिकारियों को भी कहीं ना कहीं कटघरे में खड़ा करता है कि जब आपके ही देखरेख में प्राइवेट ठेकेदार इसका रखरखाव करता है , देख करने के बावजूद भी इस प्रकार के कार्य पर आंखें मूंद लेना कहीं ना कहीं आपके कार्य शैली पर भी एक प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।

