
मूकनायक
बिलासपुर
नागार्जुन बुद्ध विहार, अम्बेडकर नगर. बिलासपुर में पूर्णिमा के अवसर पर विशेष वंदना का आयोजन किया गया है।
528 ई.पू. भगवान बुद्ध ने अपने जीवन का प्रथम उपदेश सारनाथ की पावन धरा पर 5 परिव्राजकों को संबोधित करते हुए दिया था। पाली भाषा में इस पावन दिवस को ” “धम्मचक्कप्पत्तनदिवसो ” कहा जाता है और जिन पांच भिक्खुओ को बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया था,बौद्ध साहित्य में उन्हें ” पंचवग्गीय भिक्खु ” कहा जाता है। इस महती अवसर की पावन स्मृति में दुनियाभर में प्रत्येक आषाढ़ पूर्णिमा को उत्सव के रूप में मनाने की प्राचीन परंपरा है।
विगत वर्षो की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आपस में प्रेम भावना, मैत्री भावना और संगठन की भावनाओं का लेकर सभी उपासक, उपसिकाओ ने अपने साथ अपना भोजन भी साथ मे लेकर आये तथा वंदना पश्चातसभी मिलकर एकसाथ भोजन ग्रहण किया गया।
इस आयोजन में नागार्जुन बुद्ध विहार अम्बेडकर नगर, बिलासपुर के हरीश वाहने, सुखनंदन मेश्राम, अशोक वाहने, नारायण राय हुमने, मगन गेडाम, एम आर बम्बोड़े, नरेन्द्र रामटेके, सारंग राव हुमने, कुणाल रामटेके, सत्यभामा नंदागौरी, संस्कृति रामटेके, उजाला चंद्रिकापुरे, संघमित्रा वाहने, नितेश अम्बादे, नमिता अम्बादे, रत्नेश उके, सुमित दामके , वीरेंद्र नागवंशी, अरुणा नागवंशी, बिन्द्राज उके, झुमूक बोरकर, वर्षा रामटेके, सात्विक रामटेके , सरोज नागदौने, राजा नंदेश्वर, देवेन्द्र मोटघरे, नीलिमा मोटघरे, कुलभुसण रावत, अर्चना रावत, जावेद खान आदि उपस्थित थे।

