
मूकनायक
बिलासपुर छत्तीसगढ़
आज 8 जुलाई है जो शिक्षा के क्षेत्र मे एक ऐतिहासिक दिन है इस दिन डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 1945 में ‘पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की थी जिसका मकसद था शिक्षा उन लोगों तक भी पहुँच सके जिन्हें सदियों से इससे वंचित रखा गया।
इस प्रेरणादायी अवसर को फूले निःशुल्क पाठशाला के छात्रों ने गंभीर चिंतन और सामूहिक सम्मान के साथ मनाया।
डॉ. आंबेडकर ने कहा था – अगर मैं, एक अकेला शिक्षित व्यक्ति, समाज में इतना बड़ा बदलाव ला सकता हूँ, तो सोचिए, अगर मेरे जैसे और लोग शिक्षित हो जाएँ, तो समाज और देश में कितना बड़ा परिवर्तन आ सकता है।
इसी सोच को साकार करने के लिए उन्होंने पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी द्वारा सिद्धार्थ कॉलेज (मुंबई) और मिलिंद कॉलेज (औरंगाबाद) जैसे कॉलेजों का निर्माण करवाया ताकि शिक्षा केवल विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों तक सीमित न रहे।
हमारे इतिहास में गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक, संत कबीर, संत रविदास, गुरु घासीदास, ज्योतिबा–सावित्री फुले और डॉ. आंबेडकर जैसे महानायक हुए, जिन्होंने शिक्षा को क्रांति का सबसे प्रभावी हथियार माना है।
उन्होंने केवल विचार नहीं दिए बल्कि उन्होंने पाठशाला और कॉलेज खोलकर अपने दौर में परिवर्तन की नींव रखी।
लेकिन आज यह आंदोलन थमता दिख रहा है।
आज के वक्त में शायद ही समाज के पास कोई ऐसा एक शैक्षणिक भवन हो जिसे वो अपना कह सकता हो,
जहां से भविष्य के बाबासाहेब आंबेडकर और ज्योतिबा फुले–सावित्री बाई फूले तैयार हो सके और यह सब केवल धन के अभाव में नहीं, बल्कि पढ़ने की आदत और चिंतन की परंपरा के क्षीण होने के कारण हुआ है। हम भूलते जा रहे है कि किताबें ही असली शक्ति हैं और शैक्षणिक संस्थाएँ ही सामाजिक परिवर्तन की नींव होती हैं।
और इसी सोच को पुनर्जीवित करने के लिए फूले निःशुल्क पाठशाला का निर्माण किया गया है ताकि बाबासाहेब और फुले दंपति द्वारा शुरू किए गए शिक्षा के आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सके। यह केवल एक पाठशाला नहीं, बल्कि एक प्रयास है अपने इतिहास, अपनी जिम्मेदारी और अपने भविष्य को समझने की।

