Thursday, February 26, 2026
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अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को देश में निम्नांकित 22 सूत्रीय मांग की अतिशीघ्र पूर्ति करते हुए उचित न्याय दिलाने पं. शंकर दादा भारतीय मूलनिवासी समाज ने ज्ञापन सौंपा

मूकनायक / दिलीप मैश्राम

बिलासपुर छत्तीसगढ़

अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को देश में निम्नांकित 22 सूत्रीय मांग की अतिशीघ्र पूर्ति करते हुए उचित न्याय दिलाने पं. शंकर दादा भारतीय मूलनिवासी समाज स्वतंत्रता संग्राम-2018कार्यालय-मकान नंबर 87 विश्राम गृह के पास कुरूद, पोस्ट व तहसील कुरूद, जिला-धमतरी (छ.ग.) ने  अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुरूद, जिला धमतरी (छ.ग.) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया भारत,माननीय प्रधानमंत्री महोदय,माननीय प्रधान न्यायाधीश उच्चत्तम न्यायालय नई दिल्ली को ज्ञापन सौंपा ज्ञापन में लेख है कि:-

1. शिक्षा को मौलिक अधिकार की घोषणा कर समस्त निजि विद्यालयों, महाविद्यालयों तकनिकी एवं मेडिकल महाविद्यालयो तथा समस्त प्रकार के निजि शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों का राष्ट्रीयकरण करे तथा पूरे देश में निःशुल्क शिक्षा व समान पाठ्यक्रम लागू करें, तथाकथित धार्मिक शिक्षा को पाठ्यक्रम से बाहर करे, तथा शासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों का उच्च प्रबंधन करें।

2. राजनीति शासकीय सेवा, उच्च शिक्षा, मेडिकल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा सहित सभी क्षेत्रो में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण और अनुसूचित जाति को 22 प्रतिशत तथा अनूसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत लागू करें।

   3.   छत्तीगढ़ राज्य की कुल 90 विधानसभा सीटों में से अन्य पिछडा वर्ग हेतु 23 सीट आरक्षित करें। अनुसूचित जनजाति की विलोपित 5 सीटें पुनः आरक्षित करें। जगदलपुर जनजाति हेतु आरक्षित करें। कुल 35 सीट यथावत आरक्षित करें। अनुसूचित जाति बहुल विधानसभा सीट अभनपुर, पाटन, दुर्ग, ग्रामीण, पलारी, कसडोल, बिल्हा, बिलासपुर को अनुसूचित जाति वर्ग हेतु आरक्षित करें, 10 आरक्षित सीट सहित कुल 17 सीटें आरक्षित करें।

4.छत्तीसगढ की कुल 11 लोकसभा सीटो में से अन्य पिछडा वर्ग हेतु 2 सीट आरक्षित करें और अनुसूचित जाति की विलोपित एक सीट सहित कुल 2 सीट यथावत आरक्षित करें।

5.कृषि भूमि संरक्षण एवं संवर्धन कानून बनाये जिसके तहत कृषि भूमि का संरक्षण एवं संवर्धन करना सरकार की जिम्मेदारी और प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा। प्रत्येक वर्ष कृषि भूमि के रकबा में वृध्दि का लक्ष्य रखें। जंगल, पहाड, तालाब, नदी, नाला, पोखर, बांध का संरक्षण करें।
6.शासकीय कृषि योग्य भूमि पर भूमिहीन लोगों हेतु सामूहिक खेती कराने की योजना बनाये।

7.वर्ष 2000 से स्थापित कारखाना, मील उघोग एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कृषि उपज क्षतिपूर्ति वार्षिक कर लगायें।

8. कृषि भूमि एवं उपजाऊ भूमि पर उघोगों की स्थापना पर प्रतिबंध लगाये।

9 .पृथक बस्तर प्रदेश की स्थापना करें। किसी भी सरकार ने नक्सली समस्या को हल नही कर पाये। नक्सली समस्या का एक ही समाधान हैं कि पृथक बस्तर प्रदेश की स्थापना हो और वहां आदिवासी मुख्यमंत्री बनें। आज भी बस्तर विकास के नाम पर नील है। भूखमरी, पलायन, बलात्कार, हिंसा, हत्या, प्रताडना, सरकारी आश्वासन, जमीन दलाली को बस्तर की पहचान की बना दी गई हैं। इसलिए पृथक बस्तर प्रदेश की स्थापना करें।

10. पिछड़ी जाति, अनुसूचित जन जाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग में दहेज जैसी कुप्रथा प्रारंभसे नहीं हैं और ना वर्तमान में हैं, फिर भी उन जाति वर्गों को दहेज कानून के दायरे में रखा गया हैं। उपरोक्त तीनो वर्गों को दहेज कानून से पृथक करें।

11. विद्यालयों, महाविद्यालयों शासकीय कार्यालयों में संविधान की प्रस्तावना के पठन के पश्चात ही कार्यारंभ अनिवार्य करें।

12. प्रत्येक भारतीय के घरों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, शासकीय एवं अर्ध शासकीय संस्थाओ, निजी संस्थानों में भारतीय संविधान की पुस्तक रखना अनिवार्य करें तथा संविधान की पुस्तक की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करें

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