लेखक: ज्ञानी राजिंद्र मेहरा मिशनरी सिंगर और प्रचारक हरियाणा
किसी बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था! उसके पास जाली वाले बक्से में बहुत सारे तीतर थे और एक छोटे से बक्से में सिर्फ एक तीतर था किसी ग्राहक ने उससे पूछा एक तीतर कितने का है? तो उसने जवाब दिया, एक तीतर की कीमत 40 रूपये है!ग्राहक ने दूसरे बक्से में जो नन्हा तीतर: था उसकी कीमत पूछी तो तीतर वाले ने जवाब दिया! अव्वल तो मैं इसे बेचना ही नहीं चाहूंगा, लेकिन अगर आप लेने की जिद करोगे तो इसकी कीमत 500 रूपये होगी. ग्राहक ने आश्चर्य से पूछा, इसकी कीमत 500 रुपया क्यों?इस पर तीतर वाले का जवाब था,ये मेरा अपना पालतू तीतर है! और यही दूसरे तीतरों को जाल में फसाने का काम करता है और दूसरे सभी इसी के फंसाये हुए तीतर है! ये चीख पुकार करके दूसरे तीतरो को बुलाता है और दूसरे तीतर बिना सोचे समझे एक जगह जमा हो जाते है और फिर मैं आसानी से शिकार कर पाता हूँ! इसके बाद फंसाने वाले तीतर को उसके मन पसंद की खुराक दे देता हूँ, जिससे ये खुश हो जाता है बस इस वजह से इसकी कीमत ज्यादा है!उस ग्राहक ने पूछा आप इतने सारे तीतर रोज कैसे पकड़ते होतो शिकारी दुकानदार बोला किजब मैं जंगल से तीतर पकड़ कर लाता हूँ तो उनमें से एकाद को पालता हूँ ,उसे अपने घर पर अलग पिंजड़े में रखता हूँ और खूब काजू किशमिश बादाम खिलाता हूँ जब तीतर बड़ा हो जाता है तो उसे पिंजड़े के साथ ही लेकर जंगल जाता हूँ वहाँ जाल बिछाता हूँ और तीतर को वहीं पिंजड़े में रखकर खुद झाड़ी के पीछे छिप जाता हूँ ।फिर तीतर मेरे इशारे पर जोर जोर से चिल्लाता है….उसकी आवाज को सुनकर जंगल के सारे तीतर ये सोचकर की ये अपनी कौम का है, जरूर किसी परेशानी में है।मदद करने के लिए खिंचे चले आते हैं और शिकारी के बिछाये हुए जाल में फंस जाते हैं।फिर शिकारी मुस्कुराते हुए आता है, पालतू तीतर को अलग कर वो सारे तीतरों को दूसरे झोले में रखकर घर ले जाता हूँ।इसके बाद अपने पालतू तीतर के सामने ही पकड़े गए सारे तीतरों को एक- एक कर काटता हूँ । मगर नालायक पालतू तीतर उफ़ तक नही करता क्योंकि उसेअपने हिस्से के खुराक काजू , किशमिश और बादाम से मतलब रहता है।कमोबेश यही हालात आज हमारे समाज में भी हो गयी है। शिकारी ( लोग और उनके चमचों..) ने ऐसे ना जाने कितने तीतर पाल रखें हैं, जो अपने समाज को कटता तो देख सकतें हैं मगर उफ़ तक नहीं करते !बाजार में उस मेरे जेसे समझदार आदमी ने उस तीतर वाले को 500 रूपये देकर उस तीतर की सरे बाजार गर्दन मरोड़ कर मार कर फेंक दिया ! किसी ने पूछा, आपने ऐसा क्यों किया? उसका जवाब था, ऐसे दगाबाज गद्दारों को जिन्दा रहने का कोई हक नहीं जो अपने फायदे के लिए अपने ही समाज को फंसाने का काम करे और अपने ही लोगो को धोखा दे।साथियों अपने समाज में अपने आस पास ऐसे घटिया और गद्दार तीतरों की पहचान करे, इनसे सावधान रहे और ऐसे गद्दारों को सबक सिखाए कि ये घटिया और गद्दार तीतर कभी भी अपने समाज के साथ गद्दारी ना कर सके।

