Thursday, February 26, 2026
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बेख़ौफ़ लुटे जा रहे जमीं आदिवासियों के उनके जीते जी…..मरने के बाद भी मयस्सर नहीं जमीन उनके दफ़न के लिये…

मूकनायक/ छत्तीसगढ़

आदिवासियों को जीते जी उनके जमीन से खदेड़ा जा ही रहा रहा है, मरने बाद भी उन्हें मिटटी संस्कार के लिए जमीन नहीं दी जा रही है. तभी तो एक गाँव के आदिवासी सरपंच के अकाल मृत्य के बाद उसके पार्थिव शरीर का मिटटी संस्कार रोड में करना पड़ा।
ये वाकिया है बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लाक के गाँव उमरिया का. गाँव में सर्व समाज के लिए स्मशान भूमि है. जिसमे गाँव के मृतकों का अंतिम संस्कार किया जाता है. अन्य समाज के लोग मृतकों का डाह संस्कार करते हैं और गोंड समाज के लोग अपने प्रचलित पारम्पर के अनुसार मिटटी संस्कार करते हैं. दोनों समाज के लोगों का अलग अलग क्षेत्र निर्धारित है. लेकिन विगत कुछ वर्षों से आदिवासियों श्मशान क्षेत्र में गैर आदिवासी लोग मकान, बाड़ी और खेत बनाकर निवास करने लगे हैं, और गाँव में विवाद की स्थिति बन गयी है. इस विवाद को सुलझाने के लिए तहसीलदार बिल्हा को ज्ञापन दिया गया है.
चूँकि यह दो समुदाय के बीच के विवाद एक संवेदनशील मामला है इसलिए ग्रामवासी सगा जानो के गुहार पर छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा तथा आदिवासी स्टूडेंट यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने ग्राम उमरिया का दौरा किया.
गाँव में बड़े बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं के साथ बैठ कर विस्तृत चर्चा हुई. जिससे यह जानकारी उभरकर आई कि ;
मौजा उमरिया तहसील बिल्हा में खसरा नं 351/1 रकबा 5.5040 हेक्टेयर = 13.65 एकड़ घास भूमि राजस्व रिकार्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। इसी भूमि को गाँव के सर्व समाज के लोग श्मशान भूमि के लिए उपयोग कर रहे हैं. बड़े बुजुर्गों ने बताया कि उनके बाप ,दादा भी कई पीढ़ियों से उक्त भूमि का उपयोग कफ़न दफ़न के लिए करते आ रहे हैं. पूर्व आदिवासी सरपंच के कार्यकाल में पंचायत से प्रस्ताव पारित कर भूमि को श्मशान भूमि चिन्हांकित करने का आवेदन मार्च 2022 में तहसीलदार बिल्हा को दिया हुआ है। सरपंच के आकस्मिक निधन की वजह से आवेदन ठंढे बसते में चला गया है।
श्मशान भूमि के उस हिस्से पर जिसमे गोंड समाज के पूर्वजों का पार्थिव देह दफ़न है उसी हिस्से पर गैर आदिवासी लोग अवैध कब्ज़ा कर मकान, बाड़ी और खेत बना लिए हैं. गांववालों के साथ प्रतिनिधि मंडल ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया।यह तय किया गया कि तहसीलदार बिल्हा की ओर से कार्यवाही का कुछ दिन इंतजार करें. उसके बाद ही मुद्दे लेकर कलेक्टर से भेंट करें.
गाँव के लोगों में मेलन बाई मरावी, मंकी बाई मरकाम,लीला बाई मरावी, उर्मिला मरकाम, रेखा मरकाम, लता मरकाम, मीणा मरावी, बिरम बाई मरावी,रुख्मनी मरकाम, देवकी मरावी, विनोद मरावी, सुखीराम छेदैहा, उमेदी मरकाम, सुकालू राम मरकाम, श्यामलाल मरकाम सहित कई सम्मानित सज्जन उपस्थित रहे।

प्रतिनिधि मंडल में रमेशचंद्र श्याम कार्यकारी अध्यक्ष के साथ रहे। समय सिंह गोंड कार्यकारी जिला अध्यक्ष, अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक आदिवासी स्टूडेंट यूनियन, जगदीश प्रसाद सिदार शिवचरण जगत जिला कोषाध्यक्ष घनश्याम खुशरो सचिव गोंड समाज सीपत परिक्षेत्र की भी उपस्थिती रही।
(रमेश चन्द्र श्याम) कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष द्वारा उक्त जानकारी प्रदान की गई है।

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