Thursday, February 26, 2026
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केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना ही मानवता नहीं है, बल्कि दूसरों के प्रति सहानुभूति, दया और करुणा का भाव रखना ही है सच्ची मानवता

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होने के साथ साथ समाज की प्रथम इकाई भी है। मनुष्य और समाज में घनिष्ठ सम्बन्ध अनिवार्य है क्योंकि उसका जन्म और पालन-पोषण समाज में व सामाजिक वातावरण में होता है। कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता क्योंकि अकेला रहना एक बहुत बड़ी साधना है। लोग समाज या परिवार में इसलिए रहते हैं कि उन्हें एक दूसरे की सहायता की आवश्यकता होती है। परिवार का अर्थ ही माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची, भाई-बहन का समूह है । इन्हीं से परिवार बनता है और कई परिवारों के मेल से समाज बनता है। व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज, समाज से शहर, राज्य और राष्ट्र बनता है।
मनुष्य का सच्चा अर्थ, उसके कार्यों और गुणों में निहित है। यह केवल शारीरिक उपस्थिति या सामाजिक स्थिति से परे है। एक सच्चा मनुष्य वह है, जो दूसरों के प्रति सहानुभूति, दया और करुणा रखता है, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलता है और अपने कार्यों से दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देता है और इसके साथ साथ मनुष्य शिक्षित और जागरूक होकर समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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