मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज व्यक्ति किसी दूसरे इंसान को अपने दिल की बात चाह कर भी इसलिए नहीं बता पाता क्योंकि उसमें “विश्वास” की कमी है। हम सामने वाले व्यक्ति से पहली बार अपने दिल की बात कहने से कतराते हैं और सोचते हैं कि वह हमारी बात सुनकर क्या सोचेग ? कहीं हमारी बात किसी दूसरे को ना बता दे ? या पीठ पीछे उसका मजाक ना बना लें । इसलिए हम अपने दिल की बात नहीं कह पाते और ऐसा हाल आज के युग में हर जगह देखने को मिल रहा है। इसी वजह से आज के रिश्तों में दूरियां दिखाई दे रही हैं। अगर आप किसी को अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसके सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाएं। एक दोस्त को अपने दिल की सारी बातें आसानी से बताई जा सकती है।
इंसान के दिल और दिमाग दोनों महत्वपूर्ण हैं और दोनों की अपनी-अपनी जगह है। जब बात भावनाओं, इच्छाओं और पसंद की हो, तो दिल की सुननी चाहिए, लेकिन जब बात तार्किकता, बुद्धि, और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की हो, तो दिमाग की सुननी चाहिए. दोनों को संतुलित करना महत्वपूर्ण है ताकि आप भावनात्मक रूप से संतुष्ट रहें और बुद्धिमान निर्णय ले सकें । अगर आपको सामने वाले की बोलने की भाषा समझ में आ गई तो आपको स्वत: मालूम हो जाएगा कि वो आपसे सच बोल रहा है या झूठ । दोस्ती करना चाह रहा है या पीछा छुड़ा रहा है। पसंद नहीं करता या दिल का हाल छुपा रहा है। सिर्फ आंखें ही नहीं बल्कि पलकें भी सामने वाले की मन की बात उजागर कर देती है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

