Thursday, February 26, 2026
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बुद्धवादी/समतावादी/क्रान्तिकारी/ सद्गुरु कबीर साहेब का जन्मोत्सव समारोह धूम-धाम से मनाया गया।


भारतीय एकता,मानव विकास,हमारा प्रयास

मूकनायक /राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

उन्नाव /उत्तर प्रदेश

   

मानव विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश के ग्राम व पोस्ट तौरा, ब्लॉक- बिछिया, तहसील व जिला- उन्नाव में दिनांक-11 जून 2025, दिन- बुधवार को समय- अपराह्न 3 बजे से मानव विकास संस्थान के संरक्षक मा. आर. आर. बौद्ध की देखरेख में सम्पन्न हुआ । ्उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानव विकास संस्थान के प्रमुख मा. डॉ.जी.पी.मानव थे।सभा की अध्यक्षता मा. राम सजीवन ने किया।संचालन डॉ रमाशंकर ने किया।पूज्य भंते कीर्ति रतन थेरे और बौधियस ने पुष्पार्पण/ दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात् बुद्ध वंदना (त्रिशरण-पंचशील) का पाठ कराया।संगठन के संरक्षक मा आर. आर. बौद्ध के चाचा श्री मा. बैजनाथ जी का 95 वां जन्मदिन सद्गुरु कबीर साहेब के जन्मोत्सव के रूप में पूर्व घोषणा के अनुसार गत वर्षों की भांति मनाया गया।मुख्य अतिथि महोदय मा.डॉ.जी.पी. मानव ने अभिवादनोपरान्त उपस्थित जन समुदाय को सद्गुरु कबीर साहेब के जन्मोत्सव की बधाई संविधान विरोधियों को छोड़कर सम्पूर्ण देश- दुनिया को प्रेषित किया। डॉ मानव जी ने आगे अपने उद्बोधन में बताया कि कई महापुरुषों का जन्म पूर्णमासी को हुआ है। तथागत भगवान् गौतम बुद्ध का वैसाख पूर्णिमा को, संत शिरोमणि रविदास जी का माघी पूर्णिमा को, सद्गुरु कबीर साहेब का ज्येष्ठ पूर्णिमा को और गुरुनानक देव का कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था। इसलिए श्रमण संस्कृति में पूर्णिमा का सबसे अधिक महत्व माना जाता है।बुद्धवादी/समतावादी/ क्रान्तिकारी, समाज सुधारक ,सद्गुरु कबीर साहेब का जन्म दिवस ज्येष्ठ- पूर्णिमा को देश एवं दुनिया में मनाया जाता है।
वैसे तो भारतीय मूलनिवासी बहुसंख्यक बहुजन समाज के बहुत सारे महापुरुषों का जीवन- परिचय विवादित है। कई विद्वानों के अनुसार सद्गुरु कबीर साहेब का जन्म वि.सं.1455 ज्येष्ठ पूर्णिमा को भारत के सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल एवं विद्वानों की नगरी काशी में हुआ था। जहां संत शिरोमणि रविदास जी का जन्म हुआ था। वहीं पर इनका भी हुआं था। उपर्युक्त तिथि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही देश-विदेश में सद्गुरु कबीर साहेब की जयंती मनाई जाती है। उनके माता- पिता नीमा- नीरू थे या नहीं, यह विषय विवादित है, किन्तु पालन- पोषण उन्होंने ही किया था। इस बात पर सभी लोग सहमत हैं। किसी प्रकार का जरा भी मतभेद नहीं है।
तथागत भगवान गौतम बुद्ध की लुप्त होती विचारधारा को सद्गुरु कबीर साहेब, सन्त शिरोमणि रविदास साहेब, गुरू नानक देव आदि ने जीवित किया। जिसे बाद में गुरू चोखामेला, गुरुघासीदास, पेरियार रामास्वामी नायकर, गुरू नारायणा, महात्मा ज्योतिबा राव फूले, संत गाडगे बाबा, साहूजी महाराज, बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर, ललई बौद्ध एवं मान्यवर कांशीराम साहेब आदि आगे बढ़ाते चले आ रहे हैं।

       विश्व प्रसिद्ध, ज्ञानपुंज भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर के तीन गुरुओं में से प्रथम गुरू सद्गुरु कबीर साहेब थे।
   *बुद्ध ने कहा था कि------*

अत्त दीपो भव। सद्गुरु कबीर साहेब ने अपनी भाषा शैली में कहा है–


करु बहियां बल आपने, छाड़ बिरानी आस। जाके आंगन में नदी बहे, मूरख कस मरत पियास।।

   *जिसे बुद्ध ने पंचशील बताया उसे सद्गुरु कबीर साहेब एवं संत शिरोमणि रविदास ने अपनी  भाषा शैली में पंच विकार समझाया है।* ------------------------------------------------
  1. हिंसा-निषेध:-
    (पाणातिपाता वेरमणी
    सिक्खापदं समादियामि)
    अजा मेध गो मेध यज्ञ,अश्व मेध नर मेध।
    कहैं कबीर अधर्म को धर्म बतावैं वेद।।
    पीर सबन की एक सी मूरख जानो नाहि। अपना गला कटाय के भिस्त बसे क्यों नाहि।।
  2. चोरी-निषेध:-
    (अदिन्नदाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि)
    चोर चुराई तूमरी गाड़ै पानी माॅहि।
    वह गाड़ै तो उछले, करनी छानी नाहि।।
    कहहिं कबीर कुछ उद्यम कीजै।आप खाय औरन को दीजै।।
    1. व्यभिचार-निषेध;-
      ( कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि)
      नारी निरखि न देखिए, निरखि न कीजै गौर।
      देखत ही ते विष चढ़ेे, मन आवे कुछ और।।
      परनारी पैनी छुरी बिरला बाचे कोय। कबहुँ छेड़ि न देखिये, हंसि हंसि खावे रोय।।
  3. झूठ – निषेध:-
    (मूसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि)
    सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे सांच है, ताके हिरदे आप।।
  4. नशा- निषेध:-
    (सुरामेरय मज्ज पमद्ट्ठाणा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि)
    भांग तमाखू छूतरा, आफू और शराब।
    *कौन करेगा बंदगी, ये तो भये खराब।। *अवगुण कहूँ शराब का,ज्ञानवन्त सुन लेय। मानुष से पशु करे द्रव्य(धन) गांठ का खोय।।* सद्गुरु कबीर साहेब वास्तव में क्रांतिकारी समाज सुधारक थे। वे सन्त शिरोमणि गुरू रविदास जी के साथ मिलकर समाज सुधार आन्दोलन चलाकर भगवान बुद्ध की मानवतावादी विचारधारा को जीवित रखा, जो आज तक प्रासंगिक है। तत्कालीन समय में उद्बोधन पद्धति छन्द शैली में थी। जिसके कारण उनके उपदेश या भाषण छन्द शैली में हैं। इसलिए उन्हें कवियों की श्रेणी में माना जाता है। उन्होने समाज में व्याप्त रूढ़ियों तथा अन्धविश्वासों पर करारा व्यंग्य किया है। वे भगवान बुद्ध की तरह सत्य को ही धर्म मानकर समाज में व्याप्त रूढ़िवादी परम्परा का खण्डन किया है। सद्गुरु कबीर साहेब एक वैज्ञानिक बुद्धवादी दृष्टिकोण रखने वाले निर्भीक दार्शनिक और समाज सुधारक थे। उनकी वाणियों का संग्रह बीजक नाम से किया गया है। जिसके तीन मुख्य भाग हैं:- 1.साखी,2.सबद, 3.रमैनी। सदगुरु कबीर साहेब का परिनिर्वाण मगहर ,उ. प्र. में हुआ था। जिसे आज संत कबीर नगर के नाम से जाना जाता है।
    सद्गुरु कबीर साहेब ने भगवान गौतम बुद्ध द्वारा स्थापित समता, स्वतंत्रता, बन्धुता, न्याय एवं ज्ञान- विज्ञान का मानव जाति को सन्देश दिया है। उन्होंने गलत को गलत और सही को सही बिना लाग लपेट के सीधा सीधा कहा है।
    भगवान बुद्ध की तरह कबीर साहेब ने भी सभी धर्मों की अवैज्ञानिक अतार्किक और काल्पनिक दुनिया को सिरे से खारिज किया है। जाति धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर इंसान को प्रेम और सद्भावना के साथ मानवता के प्रति प्रेरित किया है। उनकी कुछ वाणियाँ निम्न प्रकार हैं:

दर्शन के शिखर पर सद्गुरु कबीर साहेब –
मानुष सोई जानिए, जाहि विवेक विचार।
जाहि विवेक विचार नहिं,सो नर ढ़ोर गॅवार।।
एकै त्वचा, हाड़, मल, मूत्रा, एक रुधिर एक गुदा।
एक बूंद से सृष्टि रची है, को ब्राह्मण को शूद्रा ।।

पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय ।
अब के बिछड़े न मिले, दूर पड़ेंगे जाय।।
धार्मिक पाखण्ड पर सद्गुरु कबीर साहेब की गहरी चोट
निगुरा ब्राह्मन नहि भला, गुरुमुख भला चमार।
देवतन से कुत्ता भला,नित उठि भूके द्वार।।
कांकर-पाथर जोरि के, मस्जिद लिया बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे, क्या बहिरा हुआ खुदाय ?
पाहन पूजे हरि मिलैं, तो मैं पूजूं पहाड़।
घर की चाकी कोउ न पूजै, जेहिका पीसा खांय ?
कबीर ब्राह्मन की कथा, सो चोरन की नाव।
सबै अंधेरे मिलि बैठिया,भावै तहं ले जाय।।
जंत्र मंत्र सब झूठ है,मति भरमो
जग कोय।
सार शब्द जाने बिना, कागा हंस न होय।।
दिन भर रोजा रहत हैं, रात हनत हैं गाय।
यही खून वह बन्दगी, कैसे खुशी खुदाय।।
सामाजिक विषमता पर कबीर साहेब की क्रांति

जो तू तुर्क, तुर्कनी जाया,
भितरै खतना, क्यों ना कराया ?
जो तू बामन , बमनी जाया
आन बाट, काहे नहि आया ?.

कबीर कुआ एक है, पानी भरें
अनेक।
बर्तन में ही भेद है, पानी सब में एक।।

तहियां हम तुम एकै लोहू, एकै प्राण वियापै मोहू।
एकै जनी जना संसारा, कौन ज्ञान से भयो निनारा।।

मानव प्रेम पर सद्गुरु कबीर साहेब का मिशन

सुखिया सब संसार है, खावे अरु सोवे।
दुखिया दास कबीर है , जागे अरु रोवे।

कबीरा खड़ा बजार में, लिए लकुटिया हाथ।
जो घर फूंके आपणो,चले हमारे साथ।।
हम जब आये जग हंसा,औ हम रोय।
करनी ऐसी कर चलें, हम हंसे जग रोय।।
सद्गुरु कबीर साहेब के जीवन दर्शन और मानवता के प्रति उनके योगदान को शब्दों में बांधना असम्भव है। सद्गुरु कबीर साहेब सत्य पर चलने वाले थे। उनका निर्गुण ( सत्य) रूप बेबाक और
निडर था। वे एक दहकता हुआ अंगारा थे। जिसने सभी धर्मों की पाखंडी दुनिया को हिला कर रख दिया। जब तक दुनिया में अवैज्ञानिक धारणाएंरहेंगी। तब तक सद्गुरु कबीर साहेब हमेशा प्रासंगिक बनकर मानवता को प्रेरित करते ।*


अतः सबसे विनम्र विनती है कि सभी बुद्धवादी/ मानवतावादी लोग श्रमण संस्कृति के अनुसार पुष्पार्पित कर दीप/ मोमबत्ती जलाकर वंदना करेंगे।
सद्गुरु कबीर साहेब के साहित्य का अध्ययन करेंगे। खीर अवश्य बनायें। खायें तथा दूसरों को भी खिलायें।
इसके अतिरिक्त मा जे पी बौद्ध, मा. आर. आर. बौद्ध,मा. नरेन्द्र मौर्य एडवोकेट, मा.संजय गौतम, मान. नीलम बौद्ध, मा. पृथ्वी पाल रावत, मा. सौरभ राज भारती, मा. सुजीत अम्बेडकर, मान. कुसुम गौतम, मा. योगेन्द्र प्रताप सिंह, मा.संजय रावत आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।
आनन्द कुमार- सौरभ कुमार देवमई- उन्नाव- संगीत मंडल का गायन देर रात तक चलता रहा।

समाज से जुड़ो, समाज को जोड़ो, जातिवाद- पाखंड से नाता तोड़ो।

साहेब बंदगी। नमो बुध्दाय। जय भीम। जय भारत। जय संविधान।

      सुजीत अम्बेडकर      

तहसील अध्यक्ष-हसनगंज, उन्नाव

मानव विकास संस्थान, संस्थान, उत्तरप्रदेश।

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