मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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लालच का कोई अंत नहीं है और जो लोग लालच में फंसे रहते हैं, उनके पास कितना भी धन हो, वे गरीब ही रहते हैं क्योंकि लोभ यानी लालच ऐसी बुराई है, जिसकी वजह से हमारे दूसरे सभी गुणों का महत्व खत्म हो जाता है। लालच की वजह से व्यक्ति कभी भी संतुष्ट नहीं हो पाता है और धनवान होते हुए भी गरीब बना रहता है। असंतुष्टी की वजह से जीवन से सुख-शांति गायब हो जाती है । लालच व्यक्ति को आंतरिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है । लालच से बचने के लिए व्यक्ति को संतोष, ईमानदारी, और दूसरों के प्रति दया जैसे गुणों को अपनाना चाहिए ।
लालच एक जुनून है, एक लत है। इसे कभी तृप्त नहीं किया जा सकता, जिसे जितना अधिक मिलता है, उतनी ही इसकी आवश्यकता बढ़ती है। बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि सत्य को सिद्ध करने के लिए किसी से भी ज़िद करने की जरूरत नहीं है क्योंकि सत्य खुद सही समय पर स्वयं सिद्ध हो जाता है। इसलिए जब जिंदगी आपको दोबारा मौका दे तो पुरानी गलतियों को दोहराने की गलती कभी मत करना । कहते हैं कि हर इंसान का दिल बुरा नहीं होता, हर एक इंसान बुरा नहीं होता। बुझ जाते हैं दीए, कभी तेल की कमी से, हर बार कसूर हवा का नहीं होता..
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

