Thursday, February 26, 2026
Homeदेशशिक्षा और संस्कार दोनों का जब सही तरीके से विकास होता है,...

शिक्षा और संस्कार दोनों का जब सही तरीके से विकास होता है, तो व्यक्ति जी सकता है एक सफल जिम्मेदार और खुशहाल जीवन

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
शिक्षा और संस्कार दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। शिक्षा हमें ज्ञान और कौशल प्रदान करती है, जबकि संस्कार हमें सही और गलत के बीच अंतर करना सिखाते हैं और हमें एक अच्छा इंसान बनने में मदद करते हैं. जब शिक्षा और संस्कार दोनों का सही तरीके से विकास होता है, तो व्यक्ति एक सफल, जिम्मेदार और खुशहाल जीवन जी सकता है क्योंकि शिक्षा ही इंसान को डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, वकील और अच्छा बिजनेस मैन आदि बना सकती है । पढ़ा-लिखा इंसान किसी भी कार्य को बहुत ही अच्छे ढंग से कर सकता है । इसलिए शिक्षा हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।
शिक्षित होकर भी लोग संस्कार के बिना अधूरे रह जाते हैं | संस्कारों के बिना लोग भ्रष्ट, कपटी बन जाते हैं, सही और गलत के बीच का अंतर भूल जाते हैं |बच्चे को अगर उपहार न दिए जाएं तो वह कुछ समय तक रोएगा लेकिन अगर संस्कार ना दिए जाएं तो वह जीवन भर रोएगा। शिक्षा लेना और शिक्षा खरीदना दो अलग-अलग विषय हैं। शिक्षा लेने पर संस्कार मिलते हैं, जबकि शिक्षा खरीदने पर विद्यार्थी सेवा का उपभोक्ता बन जाता है। ठीक उसी प्रकार, जब उपभोक्ता किसी वस्तु को खरीदेगा, तो उसका मोल-भाव करेगा ही । इसलिए अगर हम शिक्षित होने के साथ साथ संस्कारी भी है तो आने वाली पीढ़ी को हमारे द्वारा मार्गदर्शन मिलेगा, वह भी संस्कारों को स्वीकार करेंगे | शिक्षा और संस्कर दोनों को साथ में लेकर चलना आवश्यक है क्योंकि इसमें हमारे परिवार, समाज और देश की भलाई है |
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments