मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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धन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जो हमारी आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होता है। यह भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। धन का सही उपयोग, बचत, निवेश और समझदारी से खर्च करना हमें संतुलित जीवन जीने में मदद करता है। हालांकि, हमें इसे जीवन का एकमात्र लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए क्योंकि मनुष्य का सबसे बड़ा धन “स्वास्थ्य” और “संतोष” है। स्वस्थ रहने से व्यक्ति अपने जीवन का भरपूर आनंद ले सकता है और संतोष से व्यक्ति को जीवन में खुशी और शांति मिलती है, वहीं मानव जीवन में विद्या, परमार्थ, ज्ञान, दयालुता आदि का निवेश भी इसमें शामिल है।
इसके साथ साथ मनुष्य का सबसे बड़ा धन होने में “विद्या” की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि विद्या के कारण ही मनुष्य, धरती के सभी प्राणियों में श्रेष्ठ माना जाता है। विद्या के अभाव में मानव जीवन निर्थक है। आपके जीवन की सुख शांति और खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इसलिए सकारात्मक सोचें और खुश रहें। बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि जो धन कमाते हैं, उससे जरूरी नहीं कि दुआएं भी कमाते हो ? लेकिन जो दुआएं कमाते हैं, वह हमेशा क्षमता से ज्यादा धन कमाएंगे क्योंकि धन आराम जरुर देता है, लेकिन दुआएं खुशी, सेहत और प्यारे रिश्ते अवश्य देती हैं । इसलिए धन के साथ हमेशा दुआएं जरूर कमाएं।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

