मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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शिक्षा से ही समाज का सर्वांगीण विकास होता है। शिक्षा के बगैर मानव की ¨जिंदगी पशु सामान मानी गई है। शिक्षा से ही मानव के जीवन में प्रकाश संभव है। जीवन सूर्य का प्रकाश है । जीवन एक चुनौती है, दर्द नहीं । अंधेरा’ अशिक्षा और अज्ञानता का प्रतीक है, जबकि ‘प्रकाश’ ज्ञान, शिक्षा और जागरूकता का प्रतिनिधित्व करता है ।
बौद्ध ग्रंथ ”महापरिनिर्बाणसुत्त’ में भी उल्लेख किया गया है कि जब बुद्ध के शिष्य आनंद तथागत के महापरिनिर्वाण के समय उनसे कुछ कहने का आग्रह करते हैं, तब तथागत बुद्ध पाली में कहते हैं कि तुम लोग अपने द्वीप में आप विहार करो अर्थात् आत्मनिर्भर बनो। बुद्ध के इस उपदेश को हम ‘अप्पो दीप भव’ अर्थात् अपने दीपक स्वयं बनो के रूप में ग्रहण करते हैं। आत्म दीप बन जाना स्वयं में ऐसे आलोक की प्रतिष्ठा है जो अंधकार को तिरोहित कर देता है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

