मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
“जो चमकते हैं वो हर बार सोना नहीं होते,
और जो सच में पाक हों, वो पर्दा नहीं ओढ़ते…”
वर्तमान हालात में हिण्डौन की अधपकी खिचड़ी जैसी राजनीति…और प्री-मैच्योर राजनेताओं के साथ जुगाड़ के सिस्टम के कारण समस्याएं पाताल तक जड़े जमा चुकी है….
भृष्ट सिस्टम की सरपरस्ती में संवेदक द्वारा मन मुताबिक कहीं ऊंची और कहीं नीची बनाई गई स्टेशन रोड की सडक, तो कभी राजधानी सी फीलिंग देने वाली मंडावरा रोड की अब ताल तलैया बनी सड़क को लेकर सवाल खड़े होते हैं,, तो कभी पानी पर व्यर्थ बहाए करोड़ों रुपए के सरकारी बजट का हिसाब मांगा जाता है… यहीं नहीं जिला अस्पताल के तमगा के साथ वेंटिलेटर पर लेटे सरकारी चिकित्सालय में रोगी सुविधा मरणासन्न हैं।
पानी के प्यासे लोग बेदर्दी सड़कों से होकर गुजरते हैं तो बीच राह में जाम का दर्द भी झेलना पड़ता है…
अब समस्याओ को लेकर जो सवाल उठ रहें हैं, वे सिर्फ़ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं—ये मसला है भरोसे का, चुनाव में भगवान समान माने जाने वाले मतदाता और नगर वासियों की उम्मीदों का।
हालांकि कभी हिंडौन के राजनेताओं की सूबे की राजनीति में तूती बोलती थी, लेकिन समय के साथ बढ़ते बड़बोलेपन एवं किसी को कुछ नहीं समझने वाली ठसक ले बैठी, और फिर शुरू हुआ राजनीतिक पतन का दौर….
बहरहाल, सरकार को चाहिए कि बिना देरी के पूरे गड़बड़झाले की निष्पक्ष एजेंसी से जाँच करवाए और जो भी सच है, उसे सामने लाए।
क्योंकि…
“जब नौजवान की आँखों से यक़ीन रूठ जाता है,
तो हुकूमत का चिराग़ भी बुझने लगता है।”
जन सुविधा सिर्फ मूलभूत आवश्यकता नहीं, बल्कि चुनाव के समय किए वादों के बीच इंसाफ़ और बराबरी के ख्वाब होती हैं। उन्हें धुंधलाने देना लोकतंत्र के लिए
सबसे बड़ा धोखा होगा।
लेखक: सामाजिक चिंतक, स्वतंत्र वरिष्ठ पत्रकार, ओमप्रकाश सुमन, हिण्डौन सिटी, करौली, राजस्थान
मो.9829852539

