मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिस व्यक्ति में किसी भी प्रकार की योग्यता या उत्कृष्टता का अभाव हो उसे ‘नालायक’ कहा जा सकता है । जन्म से कोई भी बच्चा नालायक नहीं होता। पारिवारिक परिस्थितियां और बुरी संगत उसे नालायक बना देती हैं। माता पिता इस विषय पर आत्म मंथन जरूर करें कि अगर वो आपकी नजरों में नालायक निकल गया तो इसका जिम्मेदार कौन है? परिवार की परवरिश के साथ संगत का भी असर होता है और यही कारण है कि परिवार का एक बेटा नालायक व दूसरा लायक बन जाता है। जिस के संगी-साथी साकारात्मक सोच वाले होंगे, वह अच्छी सोच रखने वाला होगा और जिसकी संगत नकारात्मक सोच वालों के साथ रहेगी, उसकी सोच भी नकारात्मक ही होती है।
इसलिए जीवन में अहंकार का अर्थ अपने ही हाथों से अपने कर्मों को राख करना है। किसी की निंदा करने से यह पता चलता है कि आपका चरित्र क्या है, ना कि उस व्यक्ति का । कुछ ऐसे गरीब भी देखे हैं, जिनके पास पैसे के सिवाय और कुछ भी नहीं है। नायक हमेशा दुश्मनों से लड़ते हैं और नालायक हमेशा अपनों से लड़ते हैं। किसी शायर की दो लाइन याद आती है:- ये सोचकर ना रोका, उस मुसाफिर को हमने, दूर जाता ही क्यूँ वो, अगर अपना होता ! बाकी:- कागज रोते नहीं, बस रुला देते हैं, चाहे वो प्रेम पत्र हो, रिजल्ट हो या फिर मेडिकल रिपोर्ट..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

