Thursday, February 26, 2026
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जब हमारी जिम्मेदारियां और जरूरतें दोनों ही अधिक हों, तब हमारा जीवन हो जाता है संघर्षमय

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिंदगी जिंदगी नहीं, जिम्मेदारी है..! जिसे हम जीते कम है, निभाते ज्यादा है…!! अपने परिवार के प्रति हमारी जिम्मेदारियों की सूची भले ही लम्बी हो, हम उनसे अपना दामन नहीं छुड़ा सकते। इसमें हमारे माता पिता, भाई बहन और उनका परिवार, पत्नी और जान से भी अज़ीज बेटे हैं । गहन विचार करें कि बेटों के प्रति भी हम अपनी जिम्मेदारियों से चूक तो नहीं रहे हैं, मगर यह समय के अनुरूप है और जल्दी ही यह सब व्यवस्थित हो जायेगा। वह वक्त से पहले समझदार होने लगा है या ख़ुशी के साथ तकलीफ देने वाला भी है। इसके अलावा रिश्ते, मित्र और बच्चों आदि की सभी जिम्मेदारियां हैं, जिनसे हम अपना मुख नहीं मोड़ सकते। उपकार का आभार मानना शिष्टाचार है, किन्तु उपकार को जीवन पर्यन्त याद रखना संस्कार है। हमारी सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की है जो हमारे जीवन की आधारशिला है। अगर हम स्वस्थ नहीं हैं, तो धन, सफलता, और रिश्ते भी अर्थहीन हो जाते हैं ।
*अच्छी नसीहतों का असर आज इसलिए नहीं होता क्योंकि लिखने वाले और पढ़ने वाले दोनों ये समझते हैं कि ये दूसरों के लिए है। *जब हमारी जिम्मेदारियां और ज़रूरतें दोनों ही अधिक हों, तब हमारा जीवन संघर्षमय हो जाता है। कुछ लोग किस्मत की तरह होते हैं, जो दुआ से मिलते हैं और कुछ लोग दुआ की तरह होते हैं, जो किस्मत बदल देते हैं। बाकी:- अजीब से नख़रे है जिंदगी के… जो पाना था, वो खो दिया और जो मिल रहा है, वो मंजूर नहीं…*
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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