मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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वास्तविकता यही है कि मनुष्य को अपने जीवन में तरह तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है । जब कोई भी इंसान अपनी कठीन परीक्षा की घड़ी के दौरान खुद कड़ी मेहनत से अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कर्मठ बन जाए तो उसके घर और बाहर वाले भी उसकी समस्या के निवारण में साथ देने लग जाते हैं। जीवन में आप पर जब भी कोई कठिन परीक्षा की घड़ी आए तो बिना घबराए उसका सामना करें और इस जीवन रुपी परीक्षा को पास करने के लिए दूसरों की मदद लें। बहुत सी परिस्थितियां हमारे अनुकूल नहीं होती और कई बार परिस्थितियां बड़ी विकट हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में इन विकट परिस्थितियों से निकलने का कोई रास्ता भी नहीं सूझता और यहीं से हमारी परीक्षा की घड़ी आरम्भ हो जाती है ।
जीवन में कुछ लोगों की परीक्षा अत्यंत कठिन होती है तो उसका परिणाम भी अत्यंत सुखद ही होता है। तमाम महापुरुषों का जीवन इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। इसलिए आरंभ से ही संयम, कठोर परिश्रम एवं न्यूनतम साधनों में जीवन व्यतीत करने की आदत बच्चों में डालनी चाहिए, ताकि भविष्य में जीवन के कठिनतम क्षणों में भी वे विचलित न हों। जीवन में सफल व्यक्ति वही है, जो इन विकट परिस्थितियों से विचलित हुए बिना जीवन में सक्रिय रहकर प्रसन्नता को बनाए रखता है । इसलिए जो आपके पास नहीं है, यदि उसे लेकर दुखी रहोगे तो जीवन में कभी भी प्रसन्न नहीं रह पाओगे । जीवन में संतुष्ट रहना भी प्रसन्नचित रहने का एकमात्र गुण है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

