Thursday, February 26, 2026
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किसी के अभद्र व्यवहार करने पर भी सहजता को धारण करते रहना ही है सज्जन होने का लक्षण

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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परिवार आचरण की पहली पाठशाला है। सत्य बोलना और उचित आचरण का पाठ प्रत्येक माता-पिता को अपनी संतान को देना चाहिए। मधुर बोलना, बड़ों का आदर, छोटों से प्यार और मित्रों से सत्य व्यवहार यह सब बच्चों को इसलिए सिखाया जाता है कि वह बड़े होकर समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सके और कोई उनके अनुचित व्यवहार के कारण उन्हें घृणा का पात्र नहीं समझे। दूसरों द्वारा प्रतिकूल व्यवहार करने पर भी आपके आचरण की मर्यादा बनी रहे, इसी का नाम सज्जनता है। सम्मान और सत्कार पाने पर तो साधारण से साधारण मनुष्य भी प्रसन्न हो सकता है। प्रसंशा प्राप्त होने पर सामने वाले को मुस्करा कर धन्यवाद देना ये काम तो कोई भी कर सकता है पर किसी के अभद्र व्यवहार करने पर भी सहजता को धारण किए रहना, यह सज्जनों का लक्षण है। सज्जन का अर्थ सम्मानित व्यक्ति नहीं अपितु सम्मान की इच्छा से रहित व्यक्तित्व है। जो सदैव शीलता और प्रेम रुपी आभूषणों से सुसज्जित है,जो हर परिस्थिति में प्रसन्न रहे और दूसरों को भी प्रसन्न रखने का भाव रखे वही सज्जन है ।
हालांकि आज के परिवर्तनशील माहौल में आप केवल सज्जन है तो हाशिये में कहीं अलग ही पड़े़ नजर आएंगे क्योंकि सज्जन लोग अपने अधिकार तक के लिए निर्लज्ज भाव से ना तो कुछ कर पाते हैं और ना ही लड़़ पाते हैं। अन्याय होने की स्थिति में सज्ज्नता उन्हें पूरी ताकत से संघर्ष नहीं करने देती । इसलिए संघर्ष करने के लिए थोड़ा सज्जनता का त्याग भी करना पड़़ता है, किसी का साथ लेना पड़़ता है। आज के समय में सज्जन लोगों को विश्वास करने योग्य साथ भी नहीं मिल पाता क्योंकि स्वार्थ के वशीभूत सभी अपनों का ही साथ देते हैं । इस स्थिति में बिना साथ लिए, बिना साथ मिले, सज्जन आदमी बेबस होकर अन्याय का शिकार बना रहता है और कम सज्जन होना सभी के बस की बात नहीं है, जबकि सज्जन व्यक्तियों में कोई लाग-लपेट या दुराव-छिपाव नहीं होता। संसार में लोगों के भिन्न-भिन्न स्वभाव होते हैं, कुछ के स्वभाव जटिल और कुछ के सरल होते हैं। मन के मनन के अनुसार कर्म करने वालों के स्वभाव में सरलता होती है। हम अपने लिए जो हितकारी समझते हैं, वही दूसरों के लिए भी हितकारी समझे। ऐसे लोग जहां भी हों, उस स्थान को सुखमय बना देते हैं, यही सज्जनता की सुगंध है। सच तो यह है कि सज्जनता पर ही दुनिया कायम है।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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