Thursday, February 26, 2026
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अनुशासित तरीके से संघर्ष कर जीवन जीने की कला सीखनी है तो मधुमक्खियों की एकता और संघर्ष से लें सबक

मूकनायक/ देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश बर्मा
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जीवन का आरंभ और अंत संघर्ष से ही होता है । बच्चे को पहली बार सांस लेने के लिए संघर्ष करना होता है और मरते समय भी सांस की डोर न टूटे, इसके लिए संघर्ष करना पड़ता है । सभी अपनी अपनी तरह से संघर्षरत करते हैं और उनके बीच से अपने लिए लक्ष्य को हासिल करना इतना आसान नहीं होता जितना संघर्ष करते हुए प्राप्त किया जाता है। यह काम जीवन पर्यन्त चलता रहता है । संघर्ष तो जीवन के साथ ही समाप्त होता है।‌ सबक सिखना है तो मधुमक्खी से सीखिए, मधुमक्खी कठिन संघर्ष का जीवंत पर्याय है। वह छोटी सी काया अपने जीवनपर्यंत संघर्ष को स्वीकार करती है। अनुशासित तरीके से संघर्ष कर जीवन जीने की कला हमें मधुमक्खी से सीखनी चाहिए। वह दिन भर कठिन यात्राएं कर मधु इकठ्ठा करती है। उसका संघर्ष दिन खुलते ही प्रारंभ हो जाता है। हमें भी अपने जीवन में मधुमक्खी से सीख लेकर प्रबल चुनौतियां भी परास्त की जा सकती हैं। हमें जीवन में कठिन संघर्ष का स्वागत करना चाहिए। जब चुनौतियां आती हैं, उसके बाद ही संघर्ष प्रारंभ होता है। हम अपने जीवन को कठिन संघर्षों के साथ ही स्वर्ण सदृश बना सकते हैं। उम्र कोई भी हो, जिन्दगी रोज कोई न कोई सबक जरूर सिखाती हैं ।
आपने देखा होगा कि पक्षी कभी भी अपने बच्चों को भविष्य के लिए घौंसला बना कर नहीं देते हैं, वे तो बस उन्हें उड़ने की कला सिखाते हैं ।सफलता आपके नैतिक मूल्यों पर टिके रहने, लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने या रोज़ाना कड़ी मेहनत करने के बारे में हो सकती है। कुछ लोगों के लिए, सफल महसूस करने का मतलब हो सकता है कि उनके पास वापस लौटने के लिए एक घर हो या नई कार या नौकरी जैसी चीज़ों को ठुकराने की आज़ादी जो उन्हें सही न लगे। रिश्तों, परिवार और दोस्तों में खुशी पाना इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपनी दिनचर्या से क्या संतुष्ट और खुश हैं। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, सफलता का यह नज़रिया बदलता है, जो हमारी संस्कृति और बचपन से हमारे द्वारा झेले गए दबावों से प्रभावित होता है। यह एक व्यक्तिगत कहानी है जो लगातार विकसित होती रहती है । कहते हैं कि जिसने अन्न के कण का मूल्य समझा है, वह सबसे बड़ा धनवान है और जिसने क्षण का मूल्य समझा है, वह सबसे बड़ा विद्वान है…। बाकि दुनिया तो टूटते हुए तारे से भी दुआ मांगती है, कौन कहता है, बर्बादी किसी के काम नहीं आती..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल

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