मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि व्यक्ति के व्यक्तिगत दृष्टिकोण और आदर्शों पर निर्भर करती हैऔर यह व्यक्ति की व्यक्तिगत परिपेक्ष्य में भिन्न हो सकती है। कुछ लोग जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि को सामाजिक सफलता, धन, या प्रमुखता में देखते हैं, जबकि दूसरे व्यक्ति इसे अध्यात्मिक जीवन में समाधान और आनंद में खोजने में मानते हैं। कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखना हर इंसान के ऊपर अलग अलग तरीके से निर्भर करता है। कुछ इंसान पैसों की तकलीफ नहीं सह पाते, तब उन्हें धैर्य की जरूरत पड़ती है। कुछ इंसान परिवारिक तकलीफ नहीं सह पाते, तब उन्हें धैर्य की जरूरत पड़ती है और कुछ इंसान जीवन में सफलता नहीं प्राप्त कर पाते, तब उन्हें धैर्य की जरूरत पड़ती है।
जीवन में किसी भी उपलब्धि को हासिल करने के लिए अपने धैर्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य वो शक्ति है, जो आपको मुश्किल से मुश्किल हालात में भी संतुलित और स्थिर बनाए रखती है, लेकिन सवाल ये उठता है कि धैर्य को कैसे बढ़ाया जाए? धैर्य कोई एक रात में आने वाला गुण नहीं है, बल्कि इसे ध्यानपूर्वक विकसित करना पड़ता है। जिस तरह आप व्यायाम करके शरीर को मजबूत बनाते हैं, वैसे ही धैर्य को अभ्यास से मजबूत बनाया जाता है। दूसरों का हिस्सा हड़पकर मिली उपलब्धि दोषपूर्ण व कष्टदायक है। इससे कटुता के अतिरिक्त अन्य कुछ भी हासिल नहीं होता। इसलिए कोई भी पारिवारिक एवं संसारिक सुख हासिल करने के लिए आत्मसाक्षात्कार जरुरी है। जो लोग ऐसा नहीं करते, उन्हें कष्ट अवश्य मिलता है। इसके विपरित आज यही स्थिति है कि हर कोई दूसरों का विश्लेषण तो करते हैं, परंतु खुद के भीतर कोई नहीं झांक रहा।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

