मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हंसना और हंसाना एक ऐसा गुण है, जो मन को हल्का और सम्बन्ध में ताजगी भर देता है। खुल कर हंसना एक औषधि सदृश है जिससे तन भी स्वस्थ रहता है और हृदय भी प्रफुल्लित हो जाता है। हालांकि इतने गुणों के रहते हुए भी खुलकर हंसने की परिस्थिति कभी-कभी ही मिलती है और मन से हंसने का आनंद भी कुछ लोग ही उठा पाते हैं। हंसाना एक कला है, जो कुछ लोग ही प्रयोग में ला पाते हैं। मानसिक शांति पाने के लिए मनुष्य का हंसना बहुत जरूरी है। हंसने से इन्सान कुछ समय के लिए सब कुछ भूल जाता है। सुख शांति की शुरुआत हंसने, हंसाने और मुस्कुराहट से ही होती है । पहले के समय में लोगों के पास समय था, वे एक दूसरे के साथ समय बिताते थे और प्रसन्न रहते थे, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास दो पल का समय नहीं है कि वह सुकून से खुलकर हंस सकें। यही कारण है कि आज के समय में लोगों को लाफिंग थेरेपी का सहारा लेना पड़ रहा है ।
वहीं हंसी से अनावश्यक भय, अनिद्रा आदि की समस्याएं भी दूर होती हैं, व्यक्ति की कार्य शक्ति बढ़ जाती है, विश्वास जगता है। हंसने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्राव कम होने लगता है। हंसने से बिमारी से ग्रस्त व्यक्ति भी अपने आपको स्वस्थ व तंदरुस्त महसूस करता है । यदि कोई व्यक्ति बिना किसी संकोच के खुलकर हंसता है तो माना जाता है कि ऐसे लोग साफ हृदय के होते हैं और रिश्तों में वफादार होते हैं। ऐसे लोगों का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है इसलिए हर कार्य में इनका दिमाग तेज चलता है। ये लोग विनम्र, दयालु और अच्छे प्रेमी होते हैं। हंसने से हमारे शरीर के मस्तिक और हार्ट में ऊर्जा रक्त संचार तीव्र गति से होने लगता हैं जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है । हंसमुख जीवन से रिश्ते भी प्रगाढ़ होते हैं। इसलिए हंसते रहे और दूसरो को भी हंसाते रहें, कभी अपने लिए, कभी अपनों के लिए।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

