मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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माँ बाप इस दुनियाँ की सबसे बड़ी पूँजी हैं । आप समाज में कितनी भी इज्जत कमा लें या कितना भी धन इकट्ठा कर लें लेकिन माँ बाप से बढ़कर इस दुनिया में कोई रिश्ता है ही नहीं, उनका स्थान और कोई ले ही नहीं सकता क्योंकि मां बाप का प्यार निस्वार्थ होता है। इस दुनिया में मां बाप ही होते हैं जो अपनी औलाद को अपने से ज्यादा सफल बनाने की कोशिश करते हैं। हर मां बाप अपनी क्षमता के अनुसार अपने बच्चों के हर सपनों को पूरा करने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं। मां बाप तो अपने पागल, अपाहिज औलाद को भी जी जान से पालते हैं। हमें तो ऐसा त्याग समर्पण और किसी रिश्ते में नहीं दिखाई देता। माँ बाप की हमेशा निस्वार्थ भाव से सेवा एवं इज्जत करिए, हम जैसा करेंगे वैसा ही हमें भी मिलेगा । मुफ्त में सिर्फ माँ-बाप का प्यार ही मिलता है, इसके बाद दुनिया में हर रिश्ते के लिए कुछ न कुछ चुकाना पड़ता है । कहते हैं कि जीवन में जख्म बड़े नहीं होते हैं, उनको भरने वाले बड़े होते हैं । इसी तरह रिश्ते बड़े नहीं होते हैं, लेकिन रिश्तों को निभाने वाले बड़े होते हैं ।
माता-पिता अपने बच्चों के जीवन में उनका उज्जवल भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे समर्थन, मार्गदर्शन और प्यार के स्तंभ हैं। परिवार वह जगह है, जहाँ जीवन शुरू होता है और प्यार कभी खत्म नहीं होता। कोई भी बच्चा चाहे कितना भी बड़ा हो जाए, उसके लिए माता-पिता की बाहों से ज़्यादा सुकून देने वाली अन्य आरामदायक कोई चीज़ नहीं होती क्योंकि मां गुण देती है तो पिता संस्कार देता है। मां साथ देती है तो पिता सहारा देता है, मां शांति देती है तो पिता सुकुन देता है। यदि आपकी कोई खबर ना ले, तो बुरा मत मानना । अब इस दुनिया में खबर लेने वाले कम, खबर फैलाने वाले ज्यादा है । इसलिए कहते हैं कि जीवन बहुत छोटा है, इसे खुलकर जिएं, प्रेम दुर्लभ है, करते रहें, और स्मृतियां सुखद हैं, संजोकर रखें..
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

