राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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संघर्ष जितना कठिन होता है, सफलता उतनी ही शानदार होती है, संघर्ष या फिर कहें कि कोई भी चुनौती बुरी नहीं होती बल्कि नीम की तरह कड़वी भले हो लेकिन सेहत के लिए अच्छी होती है, जो व्यक्ति कठिनाइयों में तपकर कष्ट झेल लेते हैं, खरे साबित होते हैं, उन्हीं लोगों को समाज सिर आंखों पर बिठाता है । यह जगजाहिर है कि रास्ता जितना दुर्लभ, पथरीला व कंटीला होगा, उस पर चलने वाले पैर भी उतने ही मजबूत होंगे और ऐसे ही लोग दुनिया में कुछ नया कर पाते हैं । बहुत से लोग समझते हैं कि जिन कठिनाइयों में कई व्यक्ति रोते हैं, मानसिक क्लेश अनुभव करते हैं, उन्हीं कठिनाइयों में दूसरे व्यक्ति नवीन प्रेरणा, नव उत्साह पाकर सफलता का वरण करते हैं। इस तरह कठिनाइयां अपने आप में कुछ नहीं हैं वरन् मन की स्थिति से ही इनका स्वरूप बनता है।
इसके विपरित जिस व्यक्ति में धैर्य और दृढ़ता के साथ कठिनाइयों का सामना करने का साहस नहीं होता, वह किसी भी पड़ाव में सफल नहीं हो सकता क्योंकि स्वयं पर भरोसा और विश्वास करने वाला व्यक्ति ही अपनी नैया पार कर सकता है । प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी, किसी ना किसी चीज के लिए संघर्ष करना पड़ता है. सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी खुद को बनाए रखने के लिए अपने जीवन में संघर्ष करते हैं । सही मायने में जीवन एक संघर्ष है, जो हमें अक्सर जिंदगी को बेहतर तरीके से जीने और सफलता को पाने के लिए प्रेरित करता है । यह संघर्ष ही होता है जो व्यक्ति को संवारता और निखारता है । इसे आप इस तरह भी समझ सकते हैं कि आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं, उन्हें उनके संघर्ष के लिए ही याद किया जाता है, जिस संघर्ष की आग में तपकर व्यक्ति अपने सपनों को साकार करता है,
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

