महाराष्ट्रा के सुपुत्र मनोज गजभार, सागर कांबले और मगध के सुपुत्र प्रिंस बुद्ध मित्रजी और बोधिसत्व के तमाम चाहने वालों का अभिनंदन…
मूकनायक के वरिष्ठ संवाददाता लक्ष्मण रोकडे धराऊत बिहार ता. २८ फरवरी २०२५ धराऊत के कुनवा पहाड़ी पर मिला हजारों वर्ष प्राचीन शैल चित्र.
बिहार के जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड मे स्थित धराऊत ग्राम आपने प्राचीन एवं ऐतिहासिक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है, इस ग्राम के निकट स्थित कुनवा की पहाड़ी मे लगभग 1600 साल प्राचीन शैल चित्र मिला है, जिसकी खोज पटना विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व के छात्र प्रिंस कुमार ‘बुद्धमित्र ‘ एवं महाराष्ट्र के शोधकर्ता सागर कांबले एवं मनोज गजभार ने किया. यह चित्र स्तुप का है जिसे पहले पत्थर पर उकेरा गया तत्पश्चात लाल रंग से घिसकर दोनो ओर रंगा गया है, जिसकी झलक आज भी देखने से प्रतीत होता है यह धरातल से 100 -150 फिट ऊपर स्थित है, ऊपर चढ़ने पर एक संकरी गुफा है उसी चट्टान मे यह चित्रित एवं उत्कृत स्तुप का चित्र मिला है, ऐसी चित्रशैली बहुत कम ही देखने को मिलती है, यह जहानाबाद जिले मे प्राप्त हूआ है संभवतः प्रथम शैल चित्र है, जिससे जिले एवं राज्य का इतिहास मे एक नया अध्याय जुड़ जाएगा!
2.(पॉइंट )- धराऊत का इतिहास है काफ़ी प्राचीन काल मे धराऊत को धर्मपुरी, कंचनपुरी आदि के नमो से जाना जाता था, प्राचीन काल मे यह स्थल काफ़ी महत्वपूर्ण स्थान रखता था, 5वी शताब्दी के प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान गुणामती ने यहा के विद्वान एवं सांख्यशास्त्र के ज्ञता माधव को शास्त्रर्थ मे पराजित किया था उसी विजय स्मृति मे स्थानीय राजा ने एक विहार बनवाया था जिसे गुणामती विहार के नाम से जाना जाता था, 7 वी शताब्दी मे प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसंग ने आपने विवरण मे इस स्थान का विस्तृत रूप से वर्णन किया है।
3.(पॉइंट )- इस गाँव मे अनेक प्राचीन मुर्तिया एवं स्तुप बिखरे पड़े है जिसमे से सबसे आकर्षक 10 फिट की बोधिसत्व की प्रतिमा उल्लेखनीय है, इस स्थल की पहचान 1861 ई. वी. मे प्रसिद्ध पुरातत्वेदा ए. कनिघम ने किया था उसके पश्चात यहा अनेक विद्वानों का आगमन होता रहा।
बोधिसत्व चैनल के सागर कांबले एवं पुरातत्व के छात्र प्रिंस ने बतया की इस स्थल का संरक्षण जरुरी है, प्राचीन बौद्ध केंद्रों मे इसका स्थान काफ़ी महत्वपूर्ण था।

