संत गुरु रविदास की जयंती पर विशेष
मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
भारत देश में अनेकों महापुरुषों का जन्म हुआ है। बहुत से गुरु हुए हैं, यह धरती शुरू से ही साधु संतों से भरी हुई है। इन्ही संतों में से एक संत हुए हैं, गुरु रविदास जिनका जन्म 1376 ईस्वी में वाराणसी में हुआ था। इनके पिता जी का नाम संतोष और माता का नाम कलसा देवी था। इनकी शादी लोना देवी से हुई थी। जिनसे इनका पुत्र विजय दास हुआ था। गुरु रविदास ने हमेशा मानता और इंसानियत का पाठ पढ़ाया। लोगों को भाईचारे की भावना का उपदेश दिया और कर्म को ही प्रधानता दी। जैसा कि हम सभी जानते हैं माघ की पूर्णिमा में गुरु रविदास जयंती मनाई जाती है कीर्तन के जाते हैं और गांव में में मेले लगते हैं। यानी के पूरे भारत में रविदास जयंती को पूरी धूमधाम से मनाया जाता है।
तो आईए जानते हैं गुरु रविदास के बारे में मुख्य बातें:
- गुरु रविदास एक महान संत और दार्शनिक थे और साथ साथ ही वो कवि और समाज सुधारक भी थे।
- वह कबीर दास जी के समकालीन ही संत हुए थे।
- उनकी शिक्षा का नाम मीरा देवी था जिनकी भक्ति को पूरा देश जानता है।
- संत गुरु रविदास के गुरु रामानंद जी थे और उनके अध्यात्म गुरु कबीर जी थे।
- गुरु रविदास जी ने बेगामपुर शहर बसाया था।
- गुरु रविदास जी धर्म के नाम पर प्रचलित पाखंडवाद और अंधविश्वास के खिलाफ थे।
- गुरु रविदास जी ने काम क्रोध लोभ मोह और अहंकार को त्यागने के लिए कहा था या उनको त्याज्य माना था।
- गुरु रविदास जी का धर्म शिक्षा पर आधारित था जिसको रविदासिया या रवि पंथ बोला जाता है।
गुरु रविदास जी एक कवि भी थे वह रचना लिखते थे। उनकी रचनाएं हैं।
- प्रभु जी तुम चंदन हम पानी
- प्रभु जी तुम संगति सरन तिहारी
- गाई गाई अब का ही गाउं
- तेरा जन काहे को बोले
- भाई रे भर्म भगति सुंजानी
रविदास जी की रचनाएं इन ग्रंथो में भी शामिल है: आदि ग्रंथ, पंचवानी और गुरु ग्रंथ साहिब.
- रविदास जी एक भारतीय संत कवि और समाज सुधारक थे तो उन्हें शिरोमणि संत गुरु की उपाधि दी गई है। उन्होंने जाति- पाती का गौर खंडन किया। गुरु रविदास जी ने अपनी रचनाओं में सरल व्यावहारिक और बृज भाषा का उपयोग किया था।
इस तरह से गुरु रविदास जी ने काफी को प्रथाओं का विरोध किया था और मानवता और इंसानियत और कर्म को सर्वोपरि बताया था। उनके इन्हीं आदर्श को लेकर पूरे देश मे गुरु रविदास जयंती मनाई जाती है। हम सबको उनके आदर्शों पर चलना चाहिए।
जय भीम नमो बुद्धाय
जय गुरु रविदास
लेखक: नीलम अंबेडकर
जिला चीफ ब्यूरो सोनीपत हरियाणा

