Thursday, February 26, 2026
Homeदेशचिंतानामक बीमारी शरीर को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ इंसान को कर देती...

चिंतानामक बीमारी शरीर को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ इंसान को कर देती है खोखला

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर, पाप से लक्ष्मी घटे, कह गए दास कबीर। संत कबीर जी का यह दोहा इंसान को सचेत करता है कि चिंता एक घोर बिमारी है, जो चिता के समान है । चिंता मानव जीवन को तहस- नहस कर देती है । यह मस्तिष्क को क्षति पहुंचाने के साथ शरीर को भी नुकसान पंहुचाती है और इंसान को खोखला कर देती है । चिंता का कारण कोई विशेष घटना या व्यक्ति विशेष से संबंधित हो सकता है, जिसके फलस्वरूप हमें चिंतारहित व खुखमय जीवन जीने के लिए अपनी सूझबूझ से चिंता के कारणों की खोज करके इसका निवारण करना ही हितकारी है ।
यदि हम यह पता लगाने में कामयाब हो जाते हैं कि हमारी चिंता का क्या कारण है, तो हम अपनी सूझ-बूझ के तौर-तरीकों से ही इसका समाधान बहुत ही आसानी से निकाल सकते हैं । हो सकता है कि केवल कुछ छोटे छोटे कदम उठाकर भ्रसक प्रयास करने से ही हम चिंतामुक्त हो जायें । बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि सीमित स्तर तक ही चिंता करना किसी खास घटना के बारे में अधिक चीजें याद करने में मददगार साबित होता है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments