मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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“परिवार” का हाथ पकड़ कर चलिये, लोगों के “पैर” पकड़ने की नौबत नहीं आएगी । परिवार के प्रति जब तक मन में “खोंट” और दिल में “पाप” है, तब तक सारे “मंत्र” और “जाप” बेकार हैं । जीवन एक यात्रा है, रो कर जीने से जीवन बहुत लम्बा लगेगा और हंस कर जीने पर कब पूरी हो जाएगी जिंदगी, पता भी नहीं चलेगा । “प्रकृति” से शिकायत क्यों है, प्रकृति ने पेट भरने की जिम्मेदारी ली है, पेटियां भरने की नहीं ।
ह्रदय कैसे चल रहा है, यह डाक्टर बता देंगे, परन्तु ह्रदय में क्या चल रहा है, यह तो हमें स्वयं को ही देखना है । अगर हम अपनी ताक़त का किसी की भलाई में इस्तेमाल नहीं कर सकते, तो वो ताक़त हमारे लिए एक दिन कठिनाई का पहाड़ भी ला सकती है । अगर आप जानना चाहते हैं कि सफलता कितनी आगे तक जाती है तो आपको असम्भवता को मात देकर आगे आना ही होगा
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

