मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बच्चों को आज हमारे द्वारा दिये गये श्रेष्ठ संस्कार ही भविष्य में हमारे घर-परिवार की खुशी का कारण बनते हैं। हमारा पूरा जीवन संस्कारों के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है। यदि जीवन में खुशियाँ हैं तो निश्चित ही हमने अच्छे संस्कारों की फसल बोयी है और यदि जीवन में कष्ट, कलह और अशांति है तो उसका सीधा सा अर्थ यह भी है कि हम कहीं न कहीं श्रेष्ठ संस्कारों की संगति से दूर रहे हैं।
यदि हमारी वृद्धावस्था, वृद्धाश्रम या विकट परिस्थितियों में कट रही है तो उसका कारण केवल हमारे बच्चे नहीं अपितु उन बच्चों को हमारे द्वारा दिये गये संस्कार भी हैं। जैसे अच्छी शिक्षा देकर श्रेष्ठ संस्कारों के बीज आज हम अपने बच्चों में डालेंगे, समय आने पर उनसे वैसा ही फल हमें प्राप्त होगा । यही हमारे खुशहाल जीवन एवं सुखमय वृद्धावस्था का रहस्य है..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

