Thursday, February 26, 2026
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बौद्ध धम्म में हर पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है विशेषकर उन धम्म बंधुओं के लिए जो ध्यान की गहराइयों में डुबकी लगा रहे हैं

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मूकनायक/ देश राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा


आज पौष पूर्णिमा है:
13 जनवरी 2025

पूर्णिमा का दिन ध्यानरत बौद्धों के लिए बहुत पवित्र और पावन दिन होता है। पूर्णिमा के दिन पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है जिससे चन्द्रमा की किरणें अमृतमयी हो जाती है। हर ध्यान से जुड़ा साधक पूर्णिमा के दिन और गहराइयों मे जाता है। जैसे चन्द्रमा पूर्णत्व को प्राप्त होता है उसी तरह ध्यानी साधक भी पूर्णता की और चला जाता है। इसलिए पूर्णिमा आनंद दायक उत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसी के साथ साथ प्रत्येक पूर्णिमा तथागत बुद्ध की किसी न किसी जीवन घटना को भी रेखांकित करती है। पौष पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध बुद्धत्व प्राप्ति के नवें वर्ष में श्रीलंका गए थे। इस दिन मगध गणराज्य के राजा बिम्बसार ने राजगृह में एक साथ 20 हजार नागरिकों के साथ धम्म दीक्षा ग्रहण की थी। पौष पूर्णिमा के अगले दिन राजा बिम्बीसार ने बुद्ध धम्म के संघ को वेणुवन ‘धम्मदान’ के रूप में अर्पित किया था, और वहाँ एक विशाल बुद्ध विहार बनवाया था। जो आज भी वहाँ विद्यमान है। इस प्रकार यह पौष पूर्णिमा बौद्धों के लिए बहुत पवित्र है और मंगलकारी है। वैसे हर पूर्णिमा के दिन उपासक उपासिकाओं द्वारा उपोसथ व्रत रखा जाता है व ध्यान साधना का अभ्यास किया जाता है। पूर्णिमा के दिन बौद्ध उपासक- उपासिकाओं को प्रातःकाल उठकर स्नानादि कर बुद्ध प्रतिमा के सम्मुख मोमबत्ती, धूपबत्ती लगाकर फूल आदि से विधिवत ज्यादा नही तो दस पन्द्रह मिनट तक परिवार के सभी सदस्यों को मिलकर धम्म वंदना करनी चाहिए। पूर्णिमा के दिन अष्टशील व्रत का पालन करना चाहिए।क्योंकि पूर्णिमा की रात उपवास करने की और वंदना पूजा-पाठ-ध्यान भावना करने की विशेष रात मानी जाती है। पूर्णिमा की रात बड़ी पावन, मंगलमय, धम्म तरंगों से ओत-प्रोत मानी जाती है । उस रात्रि को उपवास रखकर सृष्टी की धम्म तरंगों में शरीर और मन को समाविष्ट करके सुख की पाप्ति होती है इसलिए पूर्णिमा की रात को व्रत रखना चाहिए।
हर इंसान कोई ना कोई संक्खति (संस्कृति) को आगे बढ़ा ही रहा है। हमें भी अपने महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलते हुए हमें अपनी ही संस्कृति को आगे बढाना चाहिए नहीं तो आने वाली पीढी कुछ और दूसरी पाखंड मे लिप्त है उसको अपनायेगी।
आओ चलो चले बाबा साहेब के दिये धम्म की राह पर।
अत दीपो भव।
“भवतु सब्ब मंगलं”
(सबका कल्याण हो, मंगल हो, सब सुखी रहें)
जय भीम ! नमो बुद्धस्य।
किसी ने कहा फलाने पर भरोसा करो तो तुम्हारा कल्याण होगा।
किसी ने कहा ढिकाने पर भरोसा करो तो तुम्हारा कल्याण होगा।
भगवान बुद्ध ने कहा किसी पर भरोसा मत करो सिर्फ खुद पर भरोसा करो तभी तुम्हारा कल्याण होगा।
नमो बुद्धस
लेखक:
सुलेख मानव बौद्ध अधिवक्ता, डॉ सुनीता मानव बौद्ध पीएचडी हिंदी,
हरीनगर ,नरवाना ,जिला जींद, हरियाणा
9416 129 238

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