मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हमें समझाया जाता है कि ईश्वर कई रूपों में बटा हुआ है। पंचतत्व तो है ही- पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश। ये ऊपर वाले के ही रूप हैं, लेकिन एक छठवां तत्व और है जिसमें ईश्वर झांका जा सकता है और वह है रुपैया। धन के इस टुकड़े में जैसे कई चल-अचल संपत्तियां छुपी रहती है।
आपके पास जो रूपया चलकर आया है, तो मानकर चलिए कि आपसे पहले यह पता नहीं किन किन हाथों से, कौन-कौन से मकसद पूरे करके लौटा होगा। हो सकता है, इससे शराब का भुगतान किया गया हो। कोई अपराध हुआ हो। फिर किसी साधु की झोली में गिरा हो। अब आप उसका क्या उपयोग करेंगे। रुपया वही है, परंतु इस कागज़ के टुकड़े के पीछे कई गतिविधियां छिपी है। इसी तरह प्रकृति में ईश्वर है। सब अपने-अपने हिसाब से उपयोग करते हैं, ये हमारे ऊपर है कि नीयत हमारी कैसी है…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

