मूकनायक/नरेश जाटव/ कैलादेवी/करौली/राजस्थान।
एएनएम और आशा के साथ स्वस्थ- सुरक्षित प्रसवोत्तर सेवाओं पर विस्तृत चर्चा
पांच दिवसीय अभियान में स्क्रीनिंग,जांच और उपचार से वंचित नहीं रहे गर्भवती और धात्री महिलाएं-सीएमएचओ
करौली। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से प्रदेश व्यापी पांच दिवसीय अभियान के अंतर्गत जिले में सेक्टर मीटिंगों का आयोजन किया गया। जिसमें चिकित्सा अधिकारियों सहित एएनएम और आशा के साथ स्वस्थ- सुरक्षित प्रसवोत्तर सेवाओं की प्रत्येक गर्भवती और धात्री महिला तक पहुंच की समीक्षा आगामी कार्य योजना बनाई गई।
सीएमएचओ डॉ.सतीश चंद मीणा ने मैं श्री महावीर जी ब्लॉक की कटकड और हिंडौन ब्लॉक की झारेडा में आयोजित सेक्टर मीटिंग को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि जिलेभर में गर्भवती महिलाओं की सघन स्क्रीनिंग के लिए 5 दिवसीय विशेष अभियान चल रहा है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक गर्भवती को स्क्रीनिंग, जांच,उपचार और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराना है। जिसके लिए अभियान के तृतीय दिवस पर सेक्टर मीटिंगों का आयोजन किया गया है
जिनमें जिलास्तर से आरसीएचओ डॉ दीपका मीणा ने बिनेगा, कोटा छाबर, रतियापुरा और मासलपुर ,डीपीओ आशुतोष पांडे ने सपोटरा ब्लॉक के हाडोती और नरौली डांग, डीएनओ रूप सिंह धाकड़ ने लांगरा,कसेड और करणपुर , डीपीसी-आशा विश्वेंद्र शर्मा हिंडौन शहरी क्षेत्र, डीपीसी -पीसीपीएनडीटी नगीना शर्मा सहित बीसीएमओ द्वारा सहभागिता सुनिश्चित की गई है।
सीएमएचओ डॉ. सतीश चंद मीना ने बताया कि सेक्टर बैठकों में एएनएम और आशाओं से एमसीएच एन सत्रों पर लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं, आवश्यक दवाओं एवं जांचों की उपलब्धता, टीकाकरण, रिकॉर्ड संधारण तथा सेवा गुणवत्ता में सुधार के लिए पाबंद किया गया है। बैठकों दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को
सत्र स्थलों पर एएनसी में गर्भावस्था का पंजीकरण, रक्तचाप एवं वजन की जांच, हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा तथा मूत्र की आवश्यक जांच, रक्त समूह एवं अन्य निर्धारित प्रयोगशाला जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) की समय पर पहचान, आवश्यकतानुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थान के लिए रेफरल, टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) टीकाकरण, आयरन-फोलिक एसिड एवं कैल्शियम की दवाओं का वितरण तथा नियमित सेवन के संबंध में परामर्श को मजबूती प्रदान करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
साथ ही गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता, गर्भावस्था के दौरान दिखाई देने वाले खतरे के लक्षणों की पहचान, समय पर संस्थागत प्रसव, जन्म तैयारी, नवजात शिशु की देखभाल, जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ करने, छह माह तक केवल माँ का दूध पिलाने, प्रसवोत्तर देखभाल तथा परिवार नियोजन संबंधी परामर्श का आमुखीकरण किया गया।

