
सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बलरामपुर में रिकॉर्ड बारिश, जांजगीर-चांपा व बिलासपुर में झमाझम बरसात से किसानों के चेहरे खिले
रायपुर, 17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में मानसून ने इस वर्ष जोरदार दस्तक देते हुए प्रदेशभर में राहत और खुशहाली का माहौल बना दिया है। जून में बारिश की कमी के कारण प्रभावित हुई खरीफ फसलों की बुवाई को जुलाई की लगातार और व्यापक वर्षा ने नई गति दी है। खेतों में हरियाली लौट आई है और किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद जगी है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार 1 जून से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेश में औसतन 293.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो इस अवधि की अपेक्षित औसत वर्षा का 81.3 प्रतिशत है। बीते 24 घंटों में राज्य में औसतन 26.0 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिससे जलाशयों और जल स्रोतों में भी सुधार देखने को मिला है।
सबसे अधिक वर्षा जांजगीर-चांपा जिले में 80.0 मिलीमीटर दर्ज की गई। इसके बाद बिलासपुर में 74.7 मिलीमीटर तथा गरियाबंद में 68.6 मिलीमीटर बारिश हुई। धमतरी, मुंगेली और दुर्ग सहित कई मैदानी जिलों में भी मानसून पूरी सक्रियता के साथ आगे बढ़ रहा है और सामान्य वर्षा के आंकड़ों के करीब पहुंच चुका है।
मानसून की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से सामने आई है, जहां अब तक 512.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत का 177.9 प्रतिशत है। वहीं बलरामपुर में सामान्य से 133.8 प्रतिशत अधिक वर्षा होने से जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। राजधानी रायपुर में भी 354.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 110.7 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और कांकेर जैसे दक्षिणी जिलों में अभी वर्षा सामान्य से कम रही है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में सक्रिय होने वाले नए मानसूनी सिस्टम से इन क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश होगी और वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर हुई इस व्यापक वर्षा से खरीफ फसलों, विशेषकर धान की खेती को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही भूजल स्तर, जलाशयों और सिंचाई संसाधनों में सुधार से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और किसानों के लिए बेहतर उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

