Thursday, June 11, 2026
Homeदेशजो इंसान अपने माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चों या सच्चे दोस्तों की आंखों में...

जो इंसान अपने माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चों या सच्चे दोस्तों की आंखों में खुशी नहीं ला सकता, उसकी बाहरी दुनिया की तमाम अच्छाइयां हैं एक ढोंग

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
हम अक्सर समाज में ऐसे किरदारों से मिलते हैं, जो बाहर परोपकार की मूरत बने फिरते हैं—दान-पुण्य करना, अजनबियों की मदद करना और दुनिया की नजरों में एक ‘महान’ इंसान की छवि बनाए रखना, लेकिन जैसे ही वे अपने घर की दहलीज पार करते हैं, उनका मुखौटा उतर जाता है। यह कड़वी सच्चाई है कि जो इंसान अपने माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चों या उन गिने-चुने सच्चे दोस्तों की आँखों में खुशी नहीं ला सकता, जो उसकी रीढ़ हैं और इन स्थितियों में उसकी बाहरी दुनिया की तमाम अच्छाइयां महज एक सस्ता ढोंग और दिखावा हैं। माता-पिता, जिन्होंने अपनी खुशियाँ मारकर आपको बड़ा किया, अगर वे आपकी व्यस्तता या उपेक्षा के कारण उदास हैं, तो दुनिया के लिए आपका आदर-सम्मान एक छलावा है।
जीवनसाथी और बच्चे, जो आपके जीवन के सबसे घनिष्ठ साथी हैं, यदि वे आपके साथ सुरक्षित, प्रेमपूर्ण और खुशी महसूस नहीं करते, तो आपकी बाहरी सफलता और ‘नेकी’ शून्य है। वहीं सच्चे दोस्त, जो बिना किसी स्वार्थ के आपके साथ खड़े रहते हैं, यदि आप उनकी वफादारी की कद्र नहीं कर सकते तो आप कृतघ्नता का परिचय दे रहे हैं। इसलिए दुनिया को सुधारने और दूसरों की नजरों में महान बनने से पहले, अपनी आँखों को उस आंगन की ओर मोड़ें, जहाँ आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यदि आपके होने से आपके माता-पिता का चेहरा खिलता है, आपके जीवनसाथी की आँखों में सुकून है, आपके बच्चों के होंठों पर मुस्कान है और आपके सच्चे दोस्तों का दिल आश्वस्त है—तो यकीन मानिए, आप वास्तव में एक अच्छे इंसान हैं। बाकी सब महज रंगमंच का अभिनय है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments